अंतर्राष्ट्रीय
12-Jan-2026


इस्लामाबाद (ईएमएस)। ईरान में हाल के हिंसक विरोध प्रदर्शन और बढ़ती अस्थिरता ने पड़ोसी पाकिस्तान को चिंतित कर दिया है। पाकिस्तान सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ईरान की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। इस्लामाबाद को डर है कि ईरान में बढ़ती अराजकता सीधे पाकिस्तान की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिति पर असर डाल सकती है। दोनों देशों के बीच करीब 900 किमी लंबी सीमा है, जिसमें ज्यादातर पहाड़ी इलाके हैं और सीमापार नियंत्रण कमजोर है। सरकारी अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान इस ईरान का अंदरूनी मामला मानता है, लेकिन पूरी तरह से नजरअंदाज भी नहीं कर सकता। इस वजह से सरकार सतर्क है और पड़ोसी देश में किसी भी प्रकार की अराजकता को रोकने की कोशिश कर रही है। पाकिस्तान ने ईरान में अस्थिरता फैलने के संभावित खतरों के मद्देनजर ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। पाकिस्तान के राजदूत मुदस्सिर टीपू ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे ईरान यात्रा करते समय इमिग्रेशन और पासपोर्ट नियमों का पूरी तरह पालन करें और सुनिश्चित करें कि पासपोर्ट पर वैध वीजा या एग्जिट स्टैम्प मौजूद हो। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मुहम्मद हुसैन का मानना है कि पिछले तीन दशकों में ईरान में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन सत्ता परिवर्तन का कोई संकेत नहीं मिला। हालांकि, इस बार हथियारबंद प्रदर्शनकारियों की उपस्थिति नई चुनौती पेश कर रही है। विश्लेषकों के अनुसार, लंबी अवधि तक ईरान में अस्थिरता पाकिस्तान में व्यापार को बाधित कर सकती है, तस्करी नेटवर्क को बढ़ावा दे सकती है और बलूचिस्तान में सीमा प्रबंधन को जटिल बना सकती है। इसके अलावा, शरणार्थियों का दबाव बढ़ने का भी खतरा है, जिससे पाकिस्तान सरकार नई मुश्किल में फँस सकती है। राजनयिक रूप से भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है। अमेरिका और इजरायल का ईरान में दखल पाकिस्तान को कठिन स्थिति में डाल सकता है। इसतरह पाकिस्तान को ईरान, खाड़ी देशों, चीन और अमेरिका के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना होगा। इसलिए इस्लामाबाद की प्राथमिकता है कि पड़ोसी देश ईरान में स्थिरता बनी रहे ताकि सीमा सुरक्षा, आर्थिक हित और क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित न हों। आशीष दुबे / 12 जनवरी 2026