इन्दौर (ईएमएस) 19वीं अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती सोनल पटेल की कोर्ट ने करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मनीष रघुवंशी की प्रथम अग्रिम जमानत आवेदन याचिका को खारिज कर दिया। आरोप है कि मनीष रघुवंशी ने रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। जिस पर थाना लसूड़िया पुलिस द्वारा, अपराध क्रमांक 804/2022 में आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 409, 120-बी एवं मध्य प्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम, 2000 की धारा 4 एवं 6(1) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना उपरांत कोर्ट में पेश किया गया था। ट्रायल दौरान अभियोजन पैरवी अपर लोक अभियोजक अजय निमरोटे ने की उन्होंने कोर्ट को बताया कि फरियादी सुनील सोलंकी की शिकायत पर दर्ज मामले में आरोपी पर आरोप है कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने स्वराज इंडिया रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर निवेशकों को अधिक ब्याज और सुरक्षित निवेश का झांसा देकर बड़ी राशि एकत्र की, लेकिन बाद में न तो निवेश की रकम लौटाई गई और न ही वादा किए गए भूखंडों की रजिस्ट्री कराई गई। जमानत याचिका पर सुनवाई दौरान मनीष रघुवंशी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मेरे मुवक्किल मनीष रघुवंशी को झूठा फंसाया गया है और वह कंपनी का मात्र निदेशक रहा है। इस दौरान फरियादी सुनील सोलंकी की ओर से अधिवक्ता चंचल गुप्ता ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि पूरे निवेश घोटाले में आरोपी की भूमिका ही महत्वपूर्ण रही है और उसने ही निवेशकों की गाढ़ी कमाई हड़पी गई है। अभियोजन पैरवी करते अपर लोक अभियोजक अजय निमरोटे ने अदालत को इस बात से भी अवगत कराया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है तथा प्रकरण के अन्य सह-आरोपी फरार हैं। ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत दिए जाने से जांच प्रभावित हो सकती है। सभी पक्षों के तर्क सुनने के साथ कोर्ट ने केस डायरी, दस्तावेजों और प्रकरण की परिस्थितियों का अवलोकन करते हुए कहा कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है और प्रथम दृष्टया आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। कोर्ट ने यह मानते कि इस स्तर पर आरोपी को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा आरोपी मनीष रघुवंशी की ओर से दायर धारा 482 बीएनएसएस के तहत प्रथम अग्रिम जमानत आवेदन को निरस्त कर दिया। आनन्द पुरोहित/ 13 जनवरी 2026