क्षेत्रीय
13-Jan-2026
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बलरामपुर(ईएमएस)। जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पण्डरी गांव में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इसे सीधा वन भूमि घोटाला बताते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की मिलीभगत से देवचंद साहू और लालचंद साहू ने कथित तौर पर पैसे के दम पर तीन एकड़ से अधिक वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया। वहीं कार्रवाई के नाम पर विभाग ने केवल 43 गरीब ठेला लगाने वाले ग्रामीणों को नोटिस थमा दिए, जिससे गांव में भारी आक्रोश फैल गया है। वन विभाग की ओर से जारी नोटिस में ठेला लगाने वाले ग्रामीणों को तीन दिन के भीतर वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ये लोग वर्षों से छोटे-मोटे ठेले लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं और बड़े स्तर पर हुए वन भूमि कब्जे से उनका कोई संबंध नहीं है। आरोप है कि असली अतिक्रमणकारी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों के अनुसार देवचंद साहू और लालचंद साहू द्वारा वन विभाग की कथित सहमति से लगातार 48 घंटे से अधिक समय तक जेसीबी मशीन चलाई गई। इस दौरान वन भूमि को समतल कर तीन एकड़ से अधिक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया गया। हैरानी की बात यह रही कि इतने लंबे समय तक भारी मशीनें चलने के बावजूद न तो कोई वन अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही तत्काल कोई कार्रवाई की गई। इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रेंजर की जानकारी और संरक्षण के बिना इस स्तर पर अवैध कब्जा संभव ही नहीं है। आरोप है कि भू-माफियाओं से सांठगांठ कर उन्हें वन भूमि पर कब्जा करने दिया गया और बाद में अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए गरीब ठेला वालों को नोटिस देकर कार्रवाई का दिखावा किया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग ने कार्रवाई की होती, तो वन भूमि को इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। इसके बावजूद अब तक न तो किसी बड़े भू-माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही अवैध कब्जा हटाने की ठोस पहल हुई है। मामले को लेकर पण्डरी गांव समेत आसपास के क्षेत्रों में गुस्सा और असंतोष का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए और दोषी अधिकारियों व भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। सत्यप्रकाश(ईएमएस)13 जनवरी 2026