- हाईकोर्ट ने सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दौरा कर रिपोर्ट पेश करने का कहा इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने मूक-बधिर बच्चों की ओर से दायर जनहित याचिका पर उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार की व्यथा सुनने के बाद मामले में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए कि वे खुद दौरा करें, बच्चों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझें और अपनी रिपोर्ट 3 फरवरी के पहले हाईकोर्ट में पेश करें। मूक-बधिर बच्चों की और से उनके साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार को लेकर हाइकोर्ट में दायर याचिका के बारे में अभिभाषक शन्नो शगुफ्ता खान ने बताया कि आइटीआइ में पढ़ने वाले मूक-बधिर बच्चों द्वारा शिकायत कर बताया गया था कि उनके लिए दान में आने वाला सामान यहां के लोग ही रख लेते हैं। बाद में उसी सामान को देने के लिए बच्चों से पैसे मांगे जाते हैं। बच्चों को 2023 से स्टायफंड नहीं दिया जा रहा है। सरकार की योजना के तहत उन्हें लैपटॉप नहीं दिए गए हैं। हॉस्टल में रहने वाले बच्चों से ही बर्तन धुलवाते है और गार्डन का काम करवाया जा रहा है। पढ़ाने के लिए मूक बधिर शिक्षक या दुभाषिया भी नहीं है। 10 मिनट का वीडियो बनाकर उससे ही पढ़ाया जा रहा है। आइटीआइ मूक-बधिर केंद्र, इंदौर में मूक-बधिर छात्रों के इस तरह हो रहें शोषण और साथ ही यहां के कुप्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई दौरान कोर्ट को बताया गया कि छात्रों और उनके पालकों ने कलेक्टर से शिकायत की थी। इस पर एसडीएम दौरा करने आए थे। उस समय उनके समक्ष अफसरों ने छात्रों के बजाए अन्य लोगों को खड़ा कर दिया था। उन्हें बात ही नहीं रखने दी गई। कोर्ट में पेनड्राइव के जरिए छात्रों के बयान का वीडियो भी पेश किया गया है। इसमें वे साइन लैंग्वेज में परेशानी और अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर बयान दे रहे हैं। इसके अलावा याचिका में बच्चों के हाथ से लिखी वह चिट्ठियां लगाई गई हैं, जो उन्होंने कलेक्टर, प्रिसिंपल आइटीआइ को लिखी हैं। इसके बाद कोर्ट ने सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए कि वे खुद आइटीआइ का दौरा करें और रिपोर्ट 3 फरवरी से पहले पेश करें। आनन्द पुरोहित/ 13 जनवरी 2026