नई दिल्ली,(ईएमएस)। ऑपरेशन सिंदूर में करारी शिकस्त झेलने के बावजूद पाकिस्तान अपनी भारत विरोधी गतिविधियों से बाज आता नहीं दिख रहा है। नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर से लेकर राजस्थान और गुजरात की सीमाओं तक अपनी उत्तेजक कार्रवाइयां तेज कर दी हैं। सीमा पार से जारी इन चुनौतियों के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। वर्तमान स्थितियां जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी सेना की उस रणनीति को उजागर करती हैं, जिसमें वे आतंकवाद और ड्रोन के माध्यम से भारत को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में हाल के दिनों में पाकिस्तानी ड्रोन की गतिविधियों में भारी इजाफा देखा गया है। सांबा, राजौरी और पुंछ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई घुसपैठिए ड्रोन को मार गिराया है। केवल कश्मीर ही नहीं, बल्कि राजस्थान के जैसलमेर स्थित रामगढ़ गैस थर्मल पावर प्लांट जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र में भी ड्रोन मंडराते देखे गए हैं, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खुलासा किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास छह और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार दो आतंकी कैंप अब भी सक्रिय हैं। सीमा के दूसरी ओर, पाकिस्तान ने गुजरात के कच्छ से सटे विवादित सरक्रीक क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने इस दलदली क्षेत्र को पूरी तरह से सैन्य छावनी में तब्दील कर दिया है। सिंध रेजिमेंट की क्रीक बटालियनों की संख्या दो से बढ़ाकर छह कर दी गई है और अर्धसैनिक बलों के स्थान पर पाकिस्तानी सेना की नियमित बटालियनों को तैनात किया गया है। सुजावल, घारो और बदिन के साथ-साथ अब जाती और केती बंडर में भी नई टुकड़ियों की तैनाती की गई है। नौसैनिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान ने बंधा धोरा और हरामी धोरो के बीच छह नई मरीन सुरक्षा चौकियां स्थापित की हैं। चीन की तकनीकी मदद से इस क्षेत्र में आधुनिक रडार सिस्टम और अवाक्स तैनात किए गए हैं, जबकि भोलारी फॉरवर्ड एयरबेस पर जेएफ-17 और जे-10सी लड़ाकू विमानों की तैनाती की गई है। पाकिस्तान की इन बढ़ती गतिविधियों के जवाब में भारत ने भी अपनी सुरक्षा अभेद्य कर ली है। हाल ही में भारतीय तीनों सेनाओं ने सरक्रीक से लेकर जैसलमेर तक एक व्यापक ट्राई सर्विस युद्ध अभ्यास किया, जिसमें एआई ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का परीक्षण किया गया। गुजरात तट पर कोस्ट गार्ड की रडार क्षमता बढ़ाई गई है और भुज सैन्य बेस पर आधुनिक एल-70 एयर डिफेंस गन तैनात की गई हैं। विवाद की जड़ सरक्रीक का 96 किलोमीटर लंबा दलदली मुहाना है। पाकिस्तान 1914 के एक पुराने मानचित्र के आधार पर पूरे क्रीक पर अपना दावा ठोकता है, जबकि भारत अंतरराष्ट्रीय थलवेग सिद्धांत के तहत जलमार्ग के बिल्कुल मध्य से सीमा रेखा तय करने की बात करता है। वीरेंद्र/ईएमएस/14जनवरी2026 -----------------------------------