क्षेत्रीय
14-Jan-2026
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जगदलपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में आज मनरेगा बचाओ संग्रामके तहत पंचायत जनसंपर्क पदयात्रा की शुरुआत टांडपाल पंचायत भवन से हुई, इस अवसर पर महात्मा गांधी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन करते हुए इस जनआंदोलन का शुभारंभ किया गया। मनरेगा बचाओ संग्रामके तहत पंचायत जनसंपर्क पदयात्रा की शुरुआत टांडपाल पंचायत भवन से हुई यह पंचायत जनसंपर्क पदयात्रा गुनियापाल, टाहकापाल , साकरगांव से भूर्जी होते हुए सिरीसगुड़ा में इस पदयात्रा का समापन हुआ। पंचायत जनसंपर्क पदयात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का स्थानीय ग्रामीण महिलाओं के द्वारा पारंपरिक रीतिरिवाज़ों के साथ तिलक व फूलमालाओं से स्वागत किया गया। वहीं इस पंचायत जनसंपर्क पदयात्रा के दौरान कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष के पत्रों का ग्राम प्रमुख, ग्रामीणों को वितरण किया गया। श्री बैज ने सीरीसगुड़ा में आयोजित नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए कहा मनरेगा पिछले 20 वर्षों से भारत के मजदूरों की जीवनरेखा रही है।कोविड-19 महामारी के दौरान,जब मोदी सरकार ने बिना किसी योजना के लॉकडाउन लागू कर दिया, उसके चलते लाखों प्रवासी मजदूर घर लौटने को मजबूर हुए और काम से वंचित हो गए। ऐसे समय में मनरेगा ने 4.6 करोड़ परिवारों को रोजगार दिया था।2006 में लागू होने के बाद से अब तक मनरेगा के तहत कुल मिलाकर 180 करोड़ से अधिक कार्य-दिवस सृजित किए जा चुके हैं।मनरेगा के तहत लगभग 10 करोड परिसंपत्तियों का निर्माण किया गया, जिनमें गाँवों के तालाब और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं।CAG ऑडिट सहित 200 से अधिक अध्ययनों ने यह दिखाया है कि मनरेगा देश की सबसे प्रभावी और सफल योजनाओं में से एक है। मनरेगा में मोदी सरकार के प्रस्तावित बदलाव काम के संवैधानिक अधिकार पर सीधा हमला है जिसके तहत काम करने का अधिकार छीना जा रहा है।पहले मनरेगा के तहत देश भर के प्रत्येक ग्रामीण परिवार की काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी। देश की किसी भी ग्राम पंचायत में किसी भी परिवार ‌द्वारा काम माँगने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था।और अब मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद काम अब यह अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की मर्जी से बॉटी जाने वाली एक रेवड़ी बन जाएगा। मोदी सरकार चुनेगी कि कौन-सी ग्राम पंचायतों को काम मिलेगा और किसे नहीं। ये सरकार द्वारा आपका मज़दूरी पाने का अधिकार छीना जा रहा है।पहले मनरेगा के तहत काम तय न्यूनतम मजदूरी पर दिया जाता था, जिसमें हर साल बढ़ोतरी की जाती थी।साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था, ताकि जरूरत पड़ने पर परिवारों के पास कमाई का विकल्प हमेशा मौजूद रहे।अब मोदी सरकार के इन बदलावों के तहत मजदूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी, न तो न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी होगी और न ही हर साल बढ़ोतरी का कोई गारंटी। फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमति नहीं होगी, जिससे मजदूरी की अन्य काम देने वालों से बेहतर मज़दूरी की माँग करने की ताकत कमज़ोर होगी और उन्हें बिना न्यूनतम मजदूरी के, जी भी काम मिलेगा उसे स्वीकार करने को मजबूर किया जाएगा।पहले मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों को अपने गाँव के विकास के लिए विभिन्न कार्यों में मजदूरों को नियोजित करने का अधिकार था। विकास कार्यों की योजना और सिफारिश ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं ‌द्वारा की जाती थी। ठेकेदारों पर प्रतिबंध था-मनरेगा का काम गाँव के विकास के लिए होता था। मजदूरों को स्थानीय मनरेगा मेट्स का सहयोग मिलता था।अब मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद सभी फैसले दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के जरिये लिए जाएंगे।विकास परियोजनाएँ कुछ सीमित श्रेणियों तक सिमट जाएँगी और योजना से जुड़े सारे निर्णय मोदी सरकार लेगी। ग्राम पंचायत अपना अधिकार खो देंगी और केवल मोदी सरकार के आदेशों को लागू करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएगी। ठेकेदारों को लाया जाएगा, और मजदूरों को ठेकेदारों की परियोजनाओं के लिए लेबर सप्लाई में बदल दिया जाएगा।स्थानीय कार्यों के लिए मनरेगा मेट्स नहीं होंगे।पहले मनरेगा के तहत आपकी मजदूरी का 100% भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकारें बिना किसी कठिनाई के काम उपलब्ध करा पाती थी।अब राज्य सरकारों को आपकी मज़दूरी का 40% हिस्सा स्वयं वहन करना होगा। खर्च बचाने के लिए संभव है कि वे काम बिल्कुल भी न देगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा मोदी सरकार का अब तक का रिकॉर्ड उसकी मंशा को साफ दिखाता है कि यह सरकार मजदूर विरोधी है मनरेगा योजना के तहत घोषित मजदूरी में मोदी सरकार के 11 वर्षों के कार्यकाल के दौरान मुश्किल से ही कोई बढ़ोतरी हुई है।उच्च महँगाई के बावजूद पिछले तीन वर्षों से मनरेगा के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।मजदूरों को भुगतान में बहुत ज्यादा देरी होती रही है। असल में लंबे समय तक भुगतान में हुई देरी के कारण मनरेगा के वार्षिक बजट का लगभग 20% हिस्सा पिछले वर्षों के बकाये चुकाने में ही चला जाता है।हाजिरी और कार्यों के डिजिटल सत्यापन के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम ऐप लागू करने और आधार आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) को अनिवार्य करने से 2 करोड़ मजदूरों से काम का अधिकार और उनकी वाजिब मजदूरी छिन ली गई है।मोदी सरकार ने अब काम के कानूनी अधिकार को ही समाप्त कर दिया है-जो मजदूरों के लिए आख़िरी सुरक्षा कवच था।इसलिए 125 दिन का प्रावधान महज एक जुमला है।मोदी सरकार का अब तक का रिकॉर्ड साफ दिखाता है कि उसकी मंशा इस योजना को केवल ध्वस्त करने की ही है।मनरेगा में बदलाव करने वाले नए कानूनों के मजदूरों को खतरे में डाल रही है जिससे बेरोजगारी में वृ‌द्धि होगी।न्यूनतम मजदूरी दिए बिना लोगों का श्रम के लिए शोषण होगा।शहरों की ओर मजबूरी में होने वाले पलायन में वृ‌द्धि होगी इसके साथ ही पंचायतों की शक्तियों,अधिकार और प्रासंगिकता समाप्त हो जाएगी। मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस पार्टी यह मांग करती है कि मनरेगा योजना में काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी, जवाबदेही की गारंटी मिलनी चाहिए।मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी लिया जाना चाहिए।काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली की जाए।न्यूनतम वेतन 400 रुपये की जाए। सुधीर जैन/चंद्राकर/14 जनवरी 2026