इन दिनों देश के अनेक भागों में कड़ाके की ठंड पड़ने से तापमान शून्य से भी नीचे चला गया है। ऐसे में ताप के लिए चंद लोग कमरों में अंगीठी जला कर सोने के कारण जहरीला धुआं चढ़ने से मृत्यु के शिकार हो रहे हैं।वहीं सैकड़ों लोग बिना वेंटिलेटर वाले बाथरूम में गैस गीजर का इस्तेमाल करने से आक्सीजन कम होने पर जान गंवा देते हैं। भारत के अलग-अलग हिस्सों से हर कुछ महीनों में एक जैसी खबरें सामने आती हैं। बाथरूम में नहाते समय गैस गीजर से निकली जहरीली गैस, दम घुटना और फिर अचानक बाथरूम में नहाने वाले की मौत हो जाना। ये खबरें चौंकाती जरूर हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद भुला दी जाती हैं। यही भूल सबसे खतरनाक है। क्योंकि गैस गीजर कोई अचानक खराब होने वाली मशीन नहीं, बल्कि एक ऐसा खामोश खतरा है, जो ज़रा-सी लापरवाही पर जान ले सकता है। आपको पता हो कि कमरे में लकड़ी या कोयले की अंगीठी जला कर रखने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और कार्बन मोनोआक्साइड सीधे दिमाग पर असर डालती है, जो सांस के जरिए पूरे शरीर में फैल जाती है। इससे शरीर में हीमोग्लोबिन कम हो जाने से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। इसी कारण पिछले लगभग 2 सप्ताह में हुई ऐसी दर्दनाक मौतों की झड़ी लगी हैं। इसी तरह बाथरूम में गैस गीजर चलाने पर भी आक्सीजन कम हो जाता है और अनेक लोग हर साल जान गंवा देते हैं। कुछ दुखद घटनाओं की बानगी देखिए हाल ही में उत्तर प्रदेश के बदायूं में ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया। असल में, सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला शाहबाजुर जफा में रहने वाले सलीम अहमद के दो बेटे 11 साल का सयान और 4 साल का रयान, रोज़ की तरह सुबह करीब 10 बजे बाथरूम में नहाने गए थे। बाथरूम अंदर से बंद था और गैस गीजर चालू था। आपको बता दें कि 22 दिसंबर को यूपी केपीलीभीत में शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला गुरुकुल पुरम में बाथरूम में गैस गीजर का प्रयोग करने के कारण ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से डीआरडीए के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और उनकी पत्नी की मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। नहाते समय पत्नी का दम घुटने पर पति उन्हें बचाने के लिए पहुंचा, लेकिन वह भी चपेट में आ गया और दोनों की मौत हो गई। दो जनवरी को पंजाब के शिवसेना नेता दीपक कंबुज की 22 वर्षीय पुत्री मुनमुन की बाथरूम में दम घुटने से मौत हो गई। 27 दिसम्बर, 2025 को छपरा (बिहार) में ठंड से बचने के लिए एक कमरे में अंगीठी जलाकर सो रहे 3 बच्चों और उनकी नानी की दम घुटने से मृत्यु हो गई तथा परिवार के 3 अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो गए। इस घटना में मारे गए तीनों बच्चे रिश्ते में भाई-बहन थे जो सर्दी की छुट्टियों में ननिहाल आए हुए थे 31 दिसम्बर, 2025 को गयाजी (बिहार) के कुर्किहार गांव में कमरे के भीतर ठंड से बचने के लिए दरवाजा और खिड़की बंद करके अंगीठी जला कर सो रहे सुजीत कुमार और अंशु कुमारी नामक भाई-बहन तथा उनकी नानी मीना देवी की दम घुटने से मौत हो गई। 8 जनवरी, 2026 को तरनतारन (पंजाब) में गुरमीत सिंह तथा उनकी पत्नी जसबीर कौर की ठंड से बचने के लिए जला कर कमरे में रखी लकड़ियों की गैस से दम घुटने के कारण मौत हो गई। 8 जनवरी, 2026 को ही पटौदी (हरियाणा) में ठंड से बचने के लिए कमरे में अंगीठी सुलगा कर सोना एक श्रमिक के परिवार पर आफत बन कर टूटा तथा दम घुटने से एक 11 वर्षीय बच्ची की मृत्यु एवं परिवार के 3 अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो गए। 9 जनवरी, 2026 को हजारीबाग (झारखंड) के बानादाग गांव में कड़ाके की ठंड से बचने के लिए कमरे में अंगीठी जलाकर सो रहे दम्पति की दम घुटने से जान चली गई। 9 जनवरी, 2026 को ही कोडरमा (झारखंड) के पूरना नगर में ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में कोयला जला कर सो रहे पति-पत्नी वीरेंद्र शर्मा और कांति देवी की दम घुटने से मौत हो गई। 9 जनवरी, 2026 को ही उत्तर काशी (उत्तराखंड) के चाम्पकोट में कमरे में जल रही अंगीठी की गैस के कारण एक युवक की मृत्यु हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से बीमार हो गया। 10 जनवरी, 2026 को आरा (बिहार) के छोटकी सिंगरी गांव में एक कमरे में अपने माता-पिता और बहन के साथ ठंड से बचने के लिए अंगीठी जलाकर सो रहे 12 वर्षीय बच्चे बजरंगी सिंह की मौत हो गई जबकि उसके माता-पिता और बहन गंभीर रूप से बीमार हो गए। और अब 11 जनवरी, 2026 को तरनतारन (पंजाब) में ठंड से बचने के लिए अंगीठी जलाकर सो रहे अर्शदीप सिंह (20), उसकी पत्नी जशनदीप कौर (19) तथा 2 महीने के मासूम बेटे गुरबाज सिंह की दम घुटने से मौत हो गई और अर्शदीप सिंह का साला किशन सिंह बेहोश हो गया। उक्त सब घटनाओं का सबक यही है कि बंद कमरे में अंगीठी नहीं जलानी चाहिए और यदि जलानी ही पड़े तो सोने से पहले उसे बुझा देना चाहिए ताकि धुआं पैदा न हो। इसके अलावा सोते समय खिड़की और रोशनदान भी कुछ खुले रखने चाहिएं। इसी तरह गैस गीजर एलपीजी से पानी गर्म करता है। इस प्रक्रिया में आंशिक दहन होता है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है। यह गैस न दिखती है, न सूंघी जा सकती है। यानी इंसान को पता ही नहीं चलता कि वह ज़हर सांस के साथ अंदर ले रहा है। बंद बाथरूम में यह गैस कुछ ही मिनटों में जानलेवा स्तर तक पहुंच जाती है। पहले चक्कर, फिर घबराहट, बेहोशी और कई मामलों में मौत से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। ऐसे अनेक खतरनाक हादसे के बारे में हम पढ़ चुके हैं और यह पहला और आखिरी मामला नहीं है। हर साल देश भर में अलग अलग हादसों में एक हजार से अधिक लोगों की जान ऐसी ही छोटी लेकिन गंभीर लापरवाही के कारण जा रही है। आखिर अपने बाथरूम में लोग खुद से मौत लेकर क्यों आते हैं?क्यों बंद कमरे में हीटर या अंगीठी लगा कर सो जाते हैं? स्थानीय प्रशासन और स्वयं सेवी संस्थाओं को भी चाहिए कि इस बारे लोगों को जागरूक करे, ताकि इस तरह की दर्दनाक और असामयिक मौतों के परिणामस्वरूप परिवार तबाह होने से बच सकें। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 15 जनवरी /2026