क्षेत्रीय
15-Jan-2026
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धार(ईएमएस)। मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन श्राप की देवी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है और इस दिन को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है । यानि बसंत पंचमी के दिन बिना मुहूर्त देखे कोई भी शुभ काम किया जा सकता है । बसंत पंचमी को मालवा में विशेष कर धार में महाराजा भोज का जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाता हैं । हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बसंत पंचमी का पर्व के साथ महाराजा भोज जन्मोत्सव धूम धाम से मनाया जाता है और हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का विशेष महत्व माना गया है । इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है और मान्यता है कि मां सरस्वती की कृपा से व्यक्ति के जीवन से अंधकार का नाश होता है । बसंती पंचमी का दिन बहुत ही शुभ माना गया है और पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने माघ शुक्ल की पंचमी तिथि के दिन ज्ञान, विद्या, संगीत की देवी मां सरस्वती को प्रकट किया था । बसंत पंचमी का पर्व मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में हर साल मनाया जाता है और इस दिन मां सरस्वती का विधि-विधान से पूजन किया जाता है इस साल बसंत पंचमी का त्योहार 23 जनवरी 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा । बसंत पंचमी के दिन ज्ञान, विद्या और संगीत की देवी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है । यह पूजन यदि शुभ मुहूर्त में किया जाएगा तो अधिक फलदायी होता है । पंचांग के अनुसार 23 जनवरी 2026 को मां सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:13 बजे से लेकर दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा । ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री के अनुसार इस वर्ष बसंत पंचमी 23 जनवरी शुक्रवार को है । जहाँ सकल हिंदू समाज भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त पर्यन्त माँ सरस्वती की आराधना करेंगे । ऐसी स्थिति में धार शहर में जनसमुदाय धार की स्थिति को लेकर आशंकित हैं । ऐसी स्थिति मे ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री ने बताया कि ग्रह स्थिति अत्यंत द्वंद्वात्मक और विस्फोटक ऊर्जा वाली बन रही है। जब हम धार की भोजशाला जैसे संवेदनशील स्थान के संदर्भ में ग्रहों का विश्लेषण करते हैं, तो निम्नलिखित स्थितियां उभर कर आती हैं । 1. अंगारक और उग्र संयोग (सूर्य-मंगल युति ) मकर राशि में सूर्य और मंगल की युति हो रही है। मंगल यहाँ उच्च का है। प्रभाव: मंगल युद्ध, क्रोध और भूमि का कारक है। सूर्य सत्ता और शासन का। इन दोनों का मिलना प्रशासन और जनता के बीच टकराव की स्थिति बनाता है। लाठीचार्ज/बल प्रयोग का संकेत: ज्योतिष में मंगल रक्त और बल प्रयोग का कारक है। यदि दोपहर के समय (जब सूर्य और मंगल दशम भाव में प्रबल होते हैं) भीड़ अनियंत्रित होती है, तो पुलिस को बल प्रयोग या सख्त कार्रवाई करनी पड़ सकती है। ग्रहों के अनुसार, आवेश बहुत अधिक रहेगा। 2. शनि की न्याय और दंड की स्थिति शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में है, जो मकर (जहाँ सूर्य-मंगल हैं) से द्वितीय भाव में है। प्रभाव: शनि अनुशासन और सीमाओं का देवता है। यह इस बात का संकेत है कि प्रशासन (शनि के प्रभाव में) बेहद कठोर नियम लागू करेगा। कर्फ्यू या प्रतिबंध: शनि और मंगल का एक-दूसरे के प्रभाव में होना घेराबंदी को दर्शाता है। इसका अर्थ है कि पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया जाएगा और आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध (जैसे धारा 144 या आंशिक कर्फ्यू) लगाए जा सकते हैं। 3. पूर्व भाद्रपद नक्षत्र और परिघ योग पूर्व भाद्रपद नक्षत्र: इसका प्रतीक दो मुंह वाला व्यक्ति या तलवार माना जाता है। यह नक्षत्र उग्रता और दो पक्षों के बीच तीव्र वैचारिक मतभेद को दर्शाता है। परिघ योग: जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है, परिघ का अर्थ होता है बाधा या घेरा ।ज्योतिष में इस योग में विवाद होने पर अवरोध उत्पन्न होता है। यह योग शांति भंग होने की आशंका को बल देता है। 4. समय का विश्लेषण (दोपहर का समय) दोपहर 12:00 से 3:00 बजे: इस समय के दौरान लग्न और ग्रहों की स्थिति सबसे अधिक उग्र होगी। चूँकि यही समय नमाज और पूजा के टकराव का भी है, इसलिए ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह 3 घंटे का समय सबसे अधिक संवेदनशील है। कोई अनहोनी होने की संभावना नहीं । गुरु (बृहस्पति) की दृष्टि कुछ हद तक स्थिति को संभालने का काम करेगी। राहत: गुरु का प्रभाव यह सुनिश्चित करेगा कि मामला पूरी तरह हाथ से बाहर न निकले। तनाव तो बहुत अधिक होगा, लाठीचार्ज जैसी नौबत आ सकती है, लेकिन बड़ी जनहानि या अनहोनी होने की संभावना कम है क्योंकि न्याय कारक शनि और धर्म कारक गुरु संतुलन बनाने का प्रयास करेंगे। निष्कर्ष: ज्योतिष के आधार पर यह दिन शांतिपूर्ण नहीं कहा जा सकता। यह अत्यधिक तनावपूर्ण और प्रतिबंधात्मक दिन होगा। ग्रहों की चाल इशारा कर रही है कि प्रशासन को व्यवस्था बनाए रखने के लिए कठोर दंड नीति अपनानी ही पड़ेगी। मेरी सलाह: ज्योतिषीय उग्रता को देखते हुए उस दिन अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचना और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना ही विवेकपूर्ण होगा। ईएमएस/15/01/26