-एक सप्ताह में दो लोगों की जा चुकी है जान, जिनमें एक वनकर्मी भी शामिल नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में अवैध रेत का खनन विकराल रूप ले चुका है। राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में रेत माफिया का दबदबा इतना है कि वहां के आम नागरिक ही नहीं, बल्कि पुलिस और वन विभाग के अफसर भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। जांच में सामने आया है कि दोनों राज्यों में अवैध खनन और परिवहन खुलेआम और बेखौफ तरीके से किया जा रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि बीते एक सप्ताह में दो लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें एक वनकर्मी भी ड्यूटी के दौरान मारा गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के धौलपुर जिले में चंबल नदी क्षेत्र से सामने आई घटना ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध रेत खनन रोकने गई वन विभाग की टीम पर माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया। वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल जितेंद्र को जयपुर रेफर किया, जहां इलाज के दौरान उनका पैर काटना पड़ा, लेकिन अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद प्रशासन ने कुछ अवैध रास्ते बंद किए और एक आरोपी की गिरफ्तारी की, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कार्रवाई सिर्फ दिखावटी है और माफिया का नेटवर्क जस का तस है। धौलपुर की घटना के बाद अजमेर प्रशासन अलर्ट मोड में दिखा। अवैध खनन के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए और संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। कई इलाकों में नाकेबंदी कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां जब्त की गईं और जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि थोड़े समय की सख्ती के बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं और माफिया सक्रिय हो जाता है। अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियां अवैध खनन की भेंट चढ़ रही हैं। राजगढ़ क्षेत्र के मूनपुर गांव में मंदिर के पास खुलेआम पत्थर खनन किया जा रहा है। भारी वाहन सड़कों से गुजरते हैं, लेकिन न पुलिस रोकती है और न ही वन विभाग। एक मामले में माफिया के वाहनों ने एक घर की नींव तक तोड़ दी, जिससे पशुओं की मौत हो गई। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती और पर्यावरण को अपूरणीय नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन बस्तियों के बेहद पास हो रहा है, ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आ गई हैं और प्रशासन आंख मूंद कर बैठा है। मध्य प्रदेश में भी हालात अलग नहीं हैं। श्योपुर जिले में अवैध रेत से भरे डंपर को जब्त करने गई वन विभाग की टीम पर पथराव किया गया। तेज रफ्तार ट्रैक्टर से कुचलकर एक युवक की मौत हो गई और उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई। आरोपी अब भी फरार है। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि अवैध रेत खनन सिर्फ पर्यावरण का संकट नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और मानव जीवन के लिए भी खतरा बन चुका है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन की कार्रवाई वास्तव में माफिया पर नकेल कसेगी या यह माफिया यूं ही बेलगाम घूमते रहेंगे। सिराज/ईएमएस 15जनवरी26 -----------------------------------