- एक हजार पेशेवरों को रोजगार मिलेगा, डीप-टेक नौकरियां भी होंगी पैदा नई दिल्ली,(ईएमएस)। तमिलनाडु सरकार ने भारत का पहला पूरी तरह एआई समर्पित सॉवरिन एआई पार्क बनाने के लिए सर्वम एआई के साथ समझौता किया है। राज्य में 10,000 करोड़ रुपए के निवेश से तैयार होने वाले इस पार्क से 1,000 उच्च कौशल वाले पेशेवरों को रोजगार मिलेगा, बल्कि डीप-टेक नौकरियां भी पैदा होंगी। सार्वजनिक हित वाला यह पार्क मजबूत और समावेशी एआई तंत्र के विकास में महत्त्वपूर्ण कदम है। भारत का यह अपनी तरह का पहला सॉवरिन एआई पार्क होगा जिसमें एआई कंप्यूट ढांचा, डेटा फ्रेमवर्क, मॉडल रिसर्च लैब्स और एआई नवाचार क्लस्टर के साथ-साथ एक समर्पित इंस्टीट्यूट फॉर एआई इन गवर्नेंस भी होगा। यही नहीं यहां डेटा, मॉडल और गणनाएं कानूनी दायरे में होंगे। यह पार्क एआई को बढ़ावा देने के लिए संप्रभु, नैतिक और समावेशी ढांचा सुनिश्चित करेगा। तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने कहा कि यह जनता के हित और सरकार के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए न केवल एआई को अपनाने बल्कि इसके भविष्य को आकार देने की हमारी रणनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने में आगे रहने वाली कंपनियों और स्टार्टअप को इस तकनीक को अपनाने में सक्षम बनाता है। इस अभूतपूर्व पहल के साथ एआई को बड़े पैमाने पर लागू करने में राष्ट्र का नेतृत्व करने के लिए तमिलनाडु तैयार है। शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और नागरिक जुड़ाव जैसे प्रमुख क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल कर विकास की गति को तेज किया सकता है। सर्वम एआई भारतीय जेनेरेटिव आर्टिफिशल इंटेलिजेंस कंपनी है, जो भारत के मानकों, भाषाओं और विविधता के अनुरूप समर्पित एआई प्लेटफॉर्म और फाउंडेशनल मॉडल बनाती है। सीएम एमके स्टालिन की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस संबंध में आईआईपीऐंडसी विभाग के सचिव अरुण रॉय ने कहा कि सॉवरिन एआई पार्क तमिलनाडु को दुनिया के उन चुनिंदा केंद्रों में स्थापित करेगा, जहां निवेशक एआई-आधारित तंत्र, डीप टैलेंट पूल तक सब कुछ एक ही जगह पा सकते हैं। तमिल सभ्यता की रक्षा और उसे समृद्ध करने वाली ऐतिहासिक संगम अकादमियों से प्रेरणा लेते हुए सॉवरिन एआई पार्क भी आधुनिक डिजिटल संगम के रूप में काम करेगा। यह फाउंडेशनल तमिल-फर्स्ट एआई मॉडल विकसित करेगा जो शास्त्रीय शब्दावली को आधुनिकता से जोड़ेगा, जिससे संस्कृति और संदर्भ को बारीकी से डिजिटल इंटेलिजेंस में शामिल किया जा सके। इससे राज्य में अगली पीढ़ी के एआई सिस्टम समावेशी, सटीक और स्थानीयता को ध्यान में विकसित किए जा सकेंगे। आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटि ने कहा कि जिस तरह विनिर्माण और आईटी ने पिछली पीढ़ी की नौकरियों को आकार दिया, ठीक उसी तरह आर्टिफिशल इंटेलिजेंस अगली पीढ़ी में रोजगार और नौकरियों को परिभाषित करेगा। सॉवरिन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्रंटियर रिसर्च से राज्य के छात्रों और शोधकर्ताओं को एआई के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर काम करने के लिए सक्षम बनाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य केवल एक उपभोक्ता बनाना नहीं, बल्कि तमिलनाडु की प्रतिभा शक्ति को दीर्घकालिक आर्थिक नेतृत्व में बदलना है। सिराज/ईएमएस 17 जनवरी 2026