क्षेत्रीय
17-Jan-2026
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कांकेर(ईएमएस)। जिले का दर्जा मिलने को दो दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कांकेर जिला मुख्यालय में अब तक सब्जी मंडी नहीं बन पाई है। इस वजह से सब्जी उत्पादक किसानों को अपनी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है और उन्हें मजबूरी में इसे शहर के व्यवसायियों को औने-पौने दाम में बेचना पड़ रहा है। कांकेर को जिला का दर्जा 1998 में मिला, जबकि जिले के चारामा विकासखंड में 10 साल पहले ही सब्जी मंडी शुरू हो चुकी है। लेकिन जिला मुख्यालय में मंडी की कमी के कारण गांव के सब्जी व्यवसायियों की उत्पादन में रुचि कम हो गई है और वे केवल अपने बाड़ी या कुछ एकड़ तक ही सब्जी की फसल उगाते हैं। गांव से शहर आने वाले किसानों को सड़क किनारे सब्जी पसरा लगाना पड़ता है, जिससे अनावश्यक समय की बर्बादी होती है। इसके अलावा उन्हें अक्सर कम दाम पर बिक्री करनी पड़ती है। ग्राम लारगांव मरकाटोला के चित्रसेन सोनकर, जागेश्वर सिन्हा, प्रकाश कोर्राम, प्रभु राम पटेल और इगेश ने कहा कि कांकेर में सब्जी मंडी की स्थापना जरूरी है। ग्राम बेवरती के विमल नेताम, श्याम सिंह और पुसवाड़ा के लोकेश्वर यादव ने बताया कि मंडी नहीं होने से किसानों को व्यवसायियों पर निर्भर रहना पड़ता है और उन्हें उचित मूल्य नहीं मिलता। चेंबर आफ कामर्स के अध्यक्ष अनूप शर्मा ने कहा कि सब्जी मंडी खोलने को लेकर कांकेर विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष से चर्चा की गई है। ईएमएस(राकेश गुप्ता)17 जनवरी 2026