बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने की ठोस पहल की जा रही है। अधिष्ठाता (डीन) डॉ. रमणेश मूर्ति के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की तीन दिवसीय कार्यशाला में चिकित्सा शिक्षण की पारंपरिक पद्धतियों से आगे बढकऱ आधुनिक, व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित मॉडल पर गहन मंथन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य फैकल्टी के माध्यम से भविष्य के चिकित्सकों को अधिक दक्ष, संवेदनशील और आत्मविश्वासी बनाना है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) द्वारा नियुक्त समन्वयक डॉ. परमानंद अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में सिम्स बिलासपुर, मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर एवं रांची के मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी सदस्य सहभागिता कर रहे हैं। प्रशिक्षण सत्रों में परंपरागत कक्षा शिक्षण से आगे बढकऱ कौशल आधारित, परिणामोन्मुख एवं छात्र-केंद्रित शिक्षा पद्धतियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने बदलते समय के अनुरूप चिकित्सा शिक्षा में नवाचार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रमुख सत्रों में सिम्युलेशन आधारित शिक्षण को केंद्र में रखा गया, जिसमें बताया गया कि वास्तविक मरीज के संपर्क में आने से पहले कृत्रिम वातावरण में अभ्यास कर चिकित्सक अपनी तकनीकी दक्षता के साथ-साथ ‘सॉफ्ट स्किल्स’ को भी विकसित कर सकते हैं। यह पद्धति मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ युवा चिकित्सकों में आत्मविश्वास भी बढ़ाती है। एटकॉम मॉड्यूल पर विशेष सत्र कार्यक्रम के दौरान ‘एटकॉम’मॉड्यूल के अंतर्गत मरीजों से संवाद, चिकित्सकीय नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रभावी संवाद और नैतिक मूल्यों के बिना सफल उपचार संभव नहीं है। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर डॉ. मधुमिता मूर्ति, एटकॉम समन्वयक डॉ. केशव सहित कई वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे। यह कार्यशाला सिम्स को चिकित्सा शिक्षा के आधुनिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को नई मजबूती मिलेगी। डॉ. रमणेश मूर्ति, डीन, सिम्स। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 17 जनवरी 2026