मुंबई (ईएमएस)। अभिनेता कबीर बेदी न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि इंटरनेशनल सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई। कबीर बेदी का जन्म 16 जनवरी 1946 को लाहौर में एक सिख परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव कला और अभिनय की ओर रहा। कबीर बेदी का जीवन और करियर उतार-चढ़ाव, प्रयोग और उपलब्धियों से भरा रहा है, जो किसी थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसा लगता है। अभिनय, मॉडलिंग, थिएटर और टेलीविजन हर माध्यम में उन्होंने खुद को साबित किया और सीमाओं से परे जाकर काम किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा, जहां उनकी पर्सनैलिटी और स्क्रीन प्रेजेंस ने जल्दी ही उन्हें पहचान दिलाई। मॉडलिंग के जरिए उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के दरवाजे खुले और साल 1971 में रिलीज हुई उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘हलचल’ ने उन्हें बॉलीवुड में एंट्री दिलाई। इसके बाद कबीर बेदी ने कई यादगार फिल्मों में काम किया। ‘खून भरी मांग’, ‘मैं हूं ना’ और ‘द हीरो: लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार दर्शकों को आज भी याद हैं। हालांकि, उनका करियर सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा और टेलीविजन में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। यूरोप में उन्हें असली पहचान इटली की मशहूर टीवी सीरीज ‘सैंडोकन’ से मिली। इस सीरीज ने उन्हें यूरोप में सुपरस्टार बना दिया और वहां उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग तैयार हो गई। इसके बाद कबीर बेदी ने हॉलीवुड का रुख किया और जेम्स बॉन्ड फिल्म ‘ऑक्टोपसी’ में विलेन की भूमिका निभाई। इस किरदार ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई और साबित किया कि भारतीय कलाकार भी ग्लोबल सिनेमा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कबीर बेदी केवल अभिनेता तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने थिएटर किया, विज्ञापनों में काम किया और फिल्म निर्माण की बारीकियों को भी समझा। खास बात यह रही कि उन्होंने करण जौहर की फिल्म ‘माय नेम इज खान’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया, जिससे यह साबित हुआ कि वह कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि पीछे भी उतने ही सक्षम हैं। अपने लंबे करियर में कबीर बेदी को कई सम्मान और पुरस्कार मिले। सुदामा/ईएमएस 18 जनवरी 2026