- उपभोक्ताओं की उम्मीदों को लगा झटका कोरबा (ईएमएस) बिजली संयंत्रों को एफजीडी मानकों में छूट, जीएसटी सुधार से कोयला पर सेस हटाने पर भी बिजली दरें कम नहीं होगी। वितरण कंपनी ने लगभग 6 करोड़ रुपए घाटा बताकर विद्युत नियामक आयोग के पास याचिका दाखिल कर दरें बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इससे बिजली उपभोक्ताओं की उम्मीदों को झटका लगा है। पिछले साल दो बार वितरण कंपनी ने घाटा बताकर आयोग से स्वीकृति प्राप्त कर बिजली की दरें बढ़ाई। इस बीच घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाले हाफ बिजली बिल योजना को भी कम खपत करने वालों तक सीमित कर दिया। पहले सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक बिजली बिल की हाफ योजना का लाभ मिला, लेकिन अब महीने में 100 यूनिट बिजली की खपत पर ही इसका लाभ दिया गया। जिसे 200 यूनिट तक किया गया है। ताप आधारित संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए कोयला जलाने से हानिकारक गैसों में से सल्फर डाई ऑक्साइड को अलग करने एफजीडी सिस्टम अनिवार्य किया था, लेकिन नए नियम में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के 10 किमी दायरे में लगे बिजली संयंत्रों को ही यह एफजीडी सिस्टम लगाना होगा। बिजली संयंत्रों में इन उपकरणों के इंस्टॉलेशन, संचालन व रखरखाव जैसे खर्च घट जाएंगे। साथ ही पिछले साल ही जीएसटी सुधार से कोयले पर कंपनसेशन सैस हटाया गया। कंपनसेशन सेस बिजली उत्पादन लागत में अहम मुद्दा है, क्योंकि इससे ईधन की लागत में कमी से उत्पादन लागत में कमी संभव है। जीएसटी सुधार से कोयले पर सेस हटाने पर प्रति टन कोयले के दाम में कमी आना तय है। इससे बिजली बिल में राहत का उपभोक्ताओं को इंतजार था, लेकिन बिजली बिल की दरों में किसी तरह का संशोधन नहीं हुआ। इस बीच औसतन 24 प्रतिशत तक दरें बढ़ाने का सुझाव संबंधी याचिका लगाने से बिजली उपभोक्ताओं की उम्मीदों को झटका लगा है। बिजली कंपनी ने नया टैरिफ प्लान भी आयोग में जमा किया है। 18 जनवरी / मित्तल