- नर्मदापुरम में 1242 पेड़ों की कटाई पर मांगा जवाब भोपाल (ईएमएस)। मप्र में वायु प्रदूषण और पेड़ों की कटाई पर नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) सख्त हुआ है। दोनों ही मामलों को स्वत: संज्ञान में लेते हुए एनजीटी ने जिम्मेदारों से जवाब मांगा है। एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्र पीठ भोपाल ने नर्मदापुरम वन मंडल के अंतर्गत इटारसी जोन की छिपीखापा बीट में 1242 पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) लिया है। पीठ ने पाया कि अवैध कटाई में 1242 सागौन (टीक) और 38 सटकटा पेड़ शामिल हैं। जिससे राज्य को 2.04 करोड़ रुपए से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। यह तथ्य 14 सितंबर 2025 की निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आया। एनजीटी ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अवैध कटाई की पुष्टि होने के बावजूद स्थानीय वन अधिकारियों ने जानकारी दबाई और कोई उचित वन अपराध प्रकरण दर्ज नहीं किया, जो कर्तव्य में घोर लापरवाही को दर्शाता है। अधिकरण ने इसे पर्यावरण से संबंधित गंभीर मुद्दा मानते हुए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय नगर निगम ग्रेटर मुंबई बनाम अंकिता सिन्हा (2022) के अनुरूप सुओ मोटो अधिकार का प्रयोग किया। अधिकरण ने मध्यप्रदेश राज्य, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वरिष्ठ वन अधिकारियों एवं नर्मदापुरम नगर निगम को प्रतिवादी बनाते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, एक संयुक्त समिति का गठन किया है। जिसमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि शामिल हैं। समिति को स्थल निरीक्षण कर चार सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। एमपीपीसीबी को नोडल एजेंसी बनाया गया है। अधिकरण ने संबंधित वन मंडलाधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक को यह भी निर्देश दिया है कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई और राज्य को हुए नुकसान की भरपाई, अवैध लकड़ी बिक्री से अर्जित लाभ की वसूली की जानकारी प्रस्तुत की जाए। अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। मंडीदीप में गंभीर वायु प्रदूषण पर चिंता एनजीटी ने मंडीदीप में गंभीर वायु प्रदूषण के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। पीठ ने पाया कि मंडीदीप में पिछले 15 दिन से लगातार वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर बनी हुई है और एक्यूआई 353 तक पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है। अधिकरण ने यह भी नोट किया कि कारखानों से निकलने वाला धुआं, सडक़ों की धूल तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं जिला प्रशासन की निष्क्रियता के कारण लगभग दो लाख नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। अधिकरण ने मध्यप्रदेश राज्य, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर पालिका सीएमओ मंडीदीप को प्रतिवादी बनाते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। विनोद / 18 जनवरी 26