पत्रकारिता के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी पहचान केवल उनके लिखे शब्दों से नहीं, बल्कि उनके द्वारा जिए गए आदर्शों से होती है। एक्सप्रेस मीडिया सर्विस (ईएमएस) के इंदौर ब्यूरो प्रमुख और देश के वरिष्ठतम पत्रकारों में शुमार श्रद्धेय श्री उमेश रेखे जी का मौनी अमावस्या के दिन देह त्याग करना, हिंदी पत्रकारिता के एक देदीप्यमान अध्याय का समापन है। 87 वर्ष की आयु में उनका जाना एक ऐसी रिक्तता पैदा कर गया है, जिसे सूचनाओं के इस दौर में भर पाना असंभव है। रेखे जी का जीवन सक्रिय पत्रकारिता की एक जीवंत पाठशाला था। उनके नाम दर्ज 35,000 से अधिक प्रेसवार्ताओं की रिपोर्टिंग का रिकॉर्ड वैश्विक पत्रकारिता के पटल पर भी विरला ही मिलता है। नेहरू युग के बाद से लेकर वर्तमान तक, उन्होंने देश की सत्ता बदलने वाली हर छोटी-बड़ी घटना को अपनी आँखों से देखा और तटस्थता के साथ कलमबद्ध किया। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर वर्तमान दौर के राजनेताओं तक, हर विचारधारा के दिग्गजों ने उनकी रिपोर्टिंग की निष्पक्षता का सम्मान किया। लेकिन उमेश जी की महानता केवल उनकी संख्यात्मक उपलब्धियों में नहीं थी। उनकी वास्तविक पूँजी वह नैतिक शुचिता थी, जो आज के समय में किंवदंती प्रतीत होती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. प्रकाशचंद सेठी ने उनके योगदान से प्रभावित होकर उन्हें आजीवन शासकीय आवास आवंटित किया था। आज जहाँ रसूख के दम पर सरकारी सुविधाओं को हथियाने की होड़ मची है, वहीं रेखे जी ने मिसाल पेश की कि जैसे ही उनके सुपुत्र निशिकांत रेखे ने निजी आवास लिया, उन्होंने वह आजीवन आवंटन स्वेच्छा से शासन को लौटा दिया। यह कृत्य उनके भीतर के उस स्वाभिमानी पत्रकार का परिचायक था, जिसने कभी अपनी कलम और अपनी साख का सौदा नहीं किया। विगत 27 वर्षों से ईएमएस परिवार के साथ उनका जुड़ाव एक पेशेवर बंधन से कहीं ऊपर आत्मीयता का था। 2013 में हृदय की बायपास सर्जरी जैसी गंभीर स्थिति के बाद भी उनका जीरो ग्राउंड पर सक्रिय रहना यह संदेश देता था कि एक पत्रकार कभी रिटायर नहीं होता। वे मध्यप्रदेश के संभवतः एकमात्र पत्रकार थे, जो लगातार 50 वर्षों से अधिक समय तक राज्य शासन से अधिमान्यता प्राप्त रहे। आज जब वे अनंत यात्रा पर निकल गए हैं, तो पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जहाँ पत्रकारिता केवल सूचनाओं का व्यापार नहीं, बल्कि लोकहित का संकल्प है। ईएमएस परिवार अपने इस प्रेरणापुंज और भीष्म पितामह को अश्रुपूर्ण विदाई देते हुए उनके आदर्शों को अक्षुण्ण रखने का संकल्प दोहराता है। सादर नमन, श्रद्धेय रेखे जी! आपकी बेबाक कलम और सादगीपूर्ण जीवन हमारे लिए सदैव प्रकाश-स्तंभ बना रहेगा। प्रकाश/ 18 जनवरी 2026