विश्व हिंदी दिवस पर जो 10 जनवरी 26 को मनाई जानी थी छुट्टी होने के कारण 13जनवरी 26 को टी एस एच, अनुशक्तिनगर,मुंबई में एनआरबी, ब्रिट, डी सीएसईएम, हैवी वाटर बोर्ड, डी पी एस की सयुंक्त राजभाषा समिति द्वारा मनाया गया जिसका संयोजन एनआरबी की,डॉ अनुराधा डोडके,जॉइंट डायरेक्टर राजभाषा (हिंदी) ने की एनआरबी के उत्कृष्ट वैज्ञानिक व महाप्रबंधक श्रीअजीत कुमार श्रीधर ने बताया की हिंदी कैसे अंग्रेजों ने हमें न केवल शारीरिक रूप से गुलाम बनाया,. बल्कि मानसिक रूप से भी हम उनके गुलाम बन गये। हमारे. सोचने, बोलने और यहाँ तक कि चिंतन करने में भी गुलामी की गंध आती है आज हमारे देश में बहुत सारे लोग ब्रिटिश अफसर मकोली को भूल चुके हैं। सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा: हमारा हिंदुस्तान पूरी दुनिया से बेहतर है। हम बुलबुलें हैं इसकी, ये गुलिस्ताँ हमारा: हम (भारतवासी) इस देश के बुलबुल (पक्षी) हैं, और यह देश हमारा गुलिस्ताँ (सुंदर बगीचा) है। मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना: धर्म हमें आपस में दुश्मनी करना नहीं सिखाता। हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा: हम हिंदी भाषी हैं, और यह हमारा देश (हिंदुस्तान) है। ऐतिहासिक महत्व यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान काफी लोकप्रिय हुआ था और आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर गाया जाता है। 1984 में, जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए थे, तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पूछने पर कि भारत अंतरिक्ष से कैसा दिखता है, उन्होंने इसी गीत की पहली पंक्ति का संदर्भ देते हुए जवाब दिया था, सारे जहाँ से अच्छा। यह गीत भारत के प्राकृतिक सौंदर्य, नदियों, पहाड़ों और लोगों की विविधता में एकता की भावना को खूबसूरती से दर्शाता है। लेकिन हकीकत ये है कि ब्रिटिश हुकूमत ने भारत की जमीन को गुलाम बनाया जबकि मकोली ने भारत को मानसिक रूप से गुलाम बनाया कि आज आजादी के 78 साल बाद में भी उसी दौड़ में जी रहें हैँ उन्होंने बताया की सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा एक प्रसिद्ध देशभक्ति गीत है, जिसे उर्दू के महान कवि अल्लामा इक़बालएक प्रसिद्ध देशभक्ति गीत है, जिसे उर्दू के महान कवि अल्लामा इक़बाल ने लिखा था और यह भारत की विविधता, सुंदरता और गौरव का गुणगान करता है, जिसे अक्सर देश के राष्ट्रीय गौरव और एकता के प्रतीक के रूप में गाया जाता है, और यह बताता है कि भारत दुनिया में सबसे बेहतर है और हम उसकी बुलबुलें (लोग) हैं जो एक गुलिस्ताँ (बगीचा) में रहते हैं।हिंदी है हम, वतन है हिन्दुस्तान यह एक महत्वपूर्ण और गर्वभरा नारा है, जिसका मतलब है हम हिंदी भाषा बोलते हैं, हमारा वतन हिन्दुस्तान है उसपे शब्द हिंदी के क्या गवारों का तुम्हारा घराना? याद दिलाओं स्वयं को, दोबारा चौबारा हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा. दिमाग से हो चाहे पैदल, घिरे अनैतिकता के बादल पर हो हमें अंग्रेजी मानसिकता से बाहर निकलना होगा मंच पर सभी इकाई के प्रमुख थे जिन्होंने हिंदी भाषा की गरिमा पर अपने विचार प्रस्तुत किए और मुख्य वक़्ता मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ करुणा शंकर उपाध्याय ने हिंदी में भारत में हो रहें कार्य की तारीफ की व प्रधानमंत्री श्री मोदीजी के विदेशों में हिंदी में भाषण देने हेतु उनका भारत में भाषा के विकास के लिए सराहनीय प्रयासों की कृतज्ञ ज्ञापन की और सभी ने उनकी वक़्ता को बहुत ही सुन्दरढंग से सुना और सराहना की कुल मिलाकर कार्यक्रम हिंदी के विकास में एक नई ऊर्जा दी. सभी को हार्दिक शुभकामनायें और अनेकानेक बधाई! (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 19 जनवरी /2026