लेख
10-Mar-2026
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ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब भारत में बड़े पैमाने पर दिखने लगा है। रसोई गैस की आपूर्ति पर जिस तरह के प्रतिबंध पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा लगाए जा रहे हैं, उसके बाद स्थिति बुरी तरह से गड़बड़ा गई है। होटल और रेस्टोरेंट के संचालकों को कामर्शियल गैस के सिलेंडर की आपूर्ति बंद कर दी गई है। जिसके कारण देशभर के हजारों रेस्टोरेंट और होटल बंद होने की कगार पर हैं। वहीं शादी-विवाह का सीजन होने के कारण इसका असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है। गैस सिलेंडर की कीमत पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा बढ़ा दी गई है। गैस की डिलीवरी भी मनमाने तरीके से की जा रही है। इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने आनन-फानन में एस्मा लागू किया है। इससे स्पष्ट है, भारत में रसोई गैस को लेकर अचानक पैदा हुए संकट ने आम जनता से लेकर छोटे कारोबारियों को मुसीबत में डाल दिया है। कामर्शियल एवं घरेलू एलपीजी सिलेंडरों पर लगी पाबंदियों और आपूर्ति में आई रुकावटों के कारण देश के कई शहरों में होटल, रेस्टोरेंट और छोटे खाद्य व्यवसाय बंद होने की स्थिति में आ गए हैं। देश भर के कई स्थानों के होटल और ढाबों ने अस्थायी रूप से अपने व्यवसाय को बंद करने की घोषणा कर दी है, जिससे लाखों लोगों का रोजगार और करोड़ों लोगों की नौकरी में संकट उत्पन्न हो गया है। लोगों को चाय पानी नाश्ता और खाना भी कारोबारी स्थलों पर नहीं मिल पा रहा है। कामर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल देश के लाखों छोटे बड़े व्यवसायों में होता है। जहां करोड़ों लोग काम करते हैं। सड़क किनारे चाय, पोहा, वड़ा-पाव, कुलचे-भटूरे बेचने वाले छोटे दुकानदार से लेकर बड़े रेस्टोरेंट तक सभी एलपीजी गैस पर निर्भर हैं। गैस सिलेंडर की सप्लाई में रुकावट आती है, बुकिंग पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इसका सीधा असर करोड़ों लोगों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पडने जा रहा है। देश के कई शहरों में एजेंसियों के बाहर सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। कहीं-कहीं कानून व्यवस्था की स्थिति भी गड़बड़ाने लगी है। हर तरफ बेचैनी का माहौल देखने को मिल रहा है। सरकार का दावा है, देश में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। किसी संकट की स्थिति नहीं है। विपक्ष ने संसद में चर्चा की मांग की, जिसे सरकार ने स्वीकार नहीं किया। 24 घंटे के अंदर ही जमीनी हालात कुछ और कहानी कह रहे हैं। कई जगहों पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति की शिकायतें मिलने लगी हैं। इससे लोगों के बीच घबराहट फैल रही है। गैस की आपूर्ति पर कालाबाजारी होने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है, इतने बड़े संकट में ऊर्जा आपूर्ति जैसे संवेदनशील मामले में नीतिगत निर्णय सोच-समझकर करने चाहिए। जब संसद सत्र चल रहा है, तब इस गंभीर संकट पर विस्तृत चर्चा होनी ही चाहिए। अचानक लगाए गए प्रतिबंध या आपूर्ति में बदलाव के निर्णय का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर व्यापक स्तर पर सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। एलपीजी के अभाव में होटल और छोटे खाद्य व्यवसाय बंद होने लगे हैं। इससे लाखों मजदूरों, कर्मचारियों तथा छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो रही है। शहरी क्षेत्र में खाना बनाना भी आम परिवारों के लिए बड़ा मुश्किल हो जाएगा। भारत में बिजली की आपूर्ति बेहतर स्थिति में नहीं है। जिसके कारण ऊर्जा का संकट देश में प्रत्येक परिवार पर गंभीर रूप से प्रभाव डाल रहा है। सरकार की जिम्मेदारी है, वह वर्तमान स्थिति को पारदर्शिता के साथ संसद और आम जनता के सामने रखे। देश की जनता को विश्वास में ले। रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए सुनिश्चित किया जाए। पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता निरंतर बनी रहे। छोटे कारोबारियों और उससे जुड़े हुए लोगों को परेशानियों का सामना ना करना पड़े। इसके लिए रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में व्यवधान ना हो। इनकी कीमतें नियंत्रित रहें। देश की अर्थव्यवस्था में छोटे व्यवसायों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस स्थिति में सरकार की नीति या आदेश का असर यदि आम जनता के अस्तित्व पर पड़ने लगे। उस पर गंभीरता के साथ विचार विमर्श कर निर्णय करना आवश्यक हो जाता है। केंद्र सरकार द्वारा 10 मार्च 2026 को एस्मा लागू करते हुए रिफाइनरियों और गैस आपूर्ति करने वाली कंपनियों और डीलरों के लिए 6 महीने के लिए लागू किया है। इसमें रिफाइनरी और तेल कंपनियों को आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं। अमेरिका और ईरान युद्ध के बाद जिस तरह से कच्चे तेल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति एवं कीमत बढ़ने का असर आम जनता के ऊपर प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिल रहा है। वैसी कोई तैयारी शासन स्तर पर दिख नहीं रही है। संसद सत्र में इसकी चर्चा नहीं हो रही है। इसको लेकर आम जनता के मन में वर्तमान युद्ध के हालात को देखते हुए अपने भविष्य और सरकार की विश्वसनियता को लेकर अनिश्चितता का वातावरण बढ़ता चला जा रहा है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह चिंता का सबसे बड़ा कारण है। सरकार ना तो संसद को विश्वास में ले रही है ना ही आम जनता को विश्वास में ले रही है। जिसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया आम जनता के बीच में हो रही है। ईएमएस / 10 मार्च 26