लेख
10-Mar-2026
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ब्रह्माकुमारीज संस्था में राजयोगिनी गुलज़ार दादी जहां वर्षो तक ईश्वरीय चेहरा रही वही ब्रह्माकुमारीज की मुख्य प्रशासिका के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं देंकर संस्था को रूहानियत के शीर्ष तक पहुंचाया।उनका रूहानी नाम हृदय मोहिनी था, जिनको गुलज़ार दादी के नाम से भी जाना जाता रहा। वे ब्रह्माकुमारीज अर्थात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य प्रशासनिक प्रमुख के पद पर अप्रैल सन 2020 से 10 मार्च 2021 तक रही। हालांकि गुलज़ार दादी इस संस्था से सन 1936 मे ही संस्था की स्थापना के समय से मात्र 8 वर्ष की आयु में जुड़ गई थी।वे ओम निवास नामक बोर्डिंग स्कूल के माध्यम से इस संस्था में शामिल हुईं। इस संस्था की स्थापना दादा लेखराज यानि ब्रह्मा बाबा ने बच्चों को आध्यात्मिक एवं चारित्रिक सीख देने के लिए की थी। तब से गुलज़ार दादी अपनी शारीरिक आयु 92 पूरे करके शरीर छोड़ने तक इस संस्था के प्रति समर्पित रही।गुलज़ार दादी जिनका लौकिक नाम शोभा था, का जन्म सन 1929 में अविभाजित भारत के समय हैदराबाद के सिंध शहर में हुआ था। शोभा आठ भाई बहन थे। उनकी माता ने स्वेच्छा से उनको शिवबाबा के यज्ञ में आत्मसमर्पण करा दिया था क्योंकि वे पहले ही चाहतीं थी कि उनका एक बच्चा आध्यात्मिकता की तरफ जाये।भगवान का बच्चा होने के रूहानी नशे से लबरेज़ शोभा का शुरुआती जीवन बहुत ही आनंद और मज़े में बीता। उन दिनों मुरली यानि ईश्वरीय वाणी में स्वर्ग के बारे में ही बताया जाता था। यह शिव बाबा की दादा लेखराज यानि ब्रह्मा बाबा द्वारा दी गयी शुरू की रूहानी शिक्षाएँ है। शोभा को वेदों की कोई जानकारी नहीं थी। फिर भी शिव बाबा की ईश्वरीय वाणी सुनकर,वे गहरे ईश्वरीय प्रेम और आध्यात्मिक आनंद अनुभव करने लगी थी।सन 1940 में उन्हें योग के समय सतयुग के दृश्य अनुभव होते थे। ब्रह्मा बाबा और मम्मा को भी यह दृश्य नहीं दिखते थे, परन्तु शोभा सहित कुछ छोटे बच्चों को नए युग के दृश्य दिखाई देने लगे थे। वे जो देखती थी, उसे सभी को बताती थीं। कराची में 1939 से 1950 तक रहने के बाद वे सन 1950 में ब्रह्मा बाबा के साथ माउंट आबू आ गई। तब तक शोभा यानि गुलज़ार दादी शारीरिक व आध्यात्मिक तौर पर परिपक्व हो गयीं थी और इसलिए बाबा ने उन्हें सम्पूर्ण भारत में सेवाओं के लिए भेज दिया । दादी गुलज़ार द्वारा संस्था के कई सेंटर स्थापित किए गए, जिनमे ज़्यादा तर दिल्ली के आस-पास थे। वे मम्मा की सेवाएँ सम्भालतीं थीं और ब्रह्मा बाबा मधुबन के कार्यों की देख-रेख करते थे। यहां दादी गुलज़ार आध्यात्मिक सेवाएँ देतीं थीं ।सन 1960 में वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से रूहानी सेवाएँ सम्पूर्ण भारत में फैल गईं। टेलीफोन द्वारा, ब्रह्माबाबा दादी गुलज़ार सहित सभी बच्चों से बात करते थे और ज़रूरी निर्देश देते थे। पत्र लिखना भी जारी रहा।दादी गुलज़ार ने अपना अधिकांश समय बम्बई और दिल्ली की सेवाओ में बिताया। सभी गुलजार दादी को उनकी मधुरता और प्रेम के लिए बहुत मानते थे। यहां तक की बाबा ने अपनी मुरलियों में भी कहा है की दिल्ली क्षेत्र में दादी गुलज़ार बहुत सेवारत रही।गुलजार दादी ने ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूज़ीलैंड, फिलीपींस, हॉन्ग कॉन्ग, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राज़ील, मेक्सिको, केनेडा, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस, हॉलैंड, पोलैंड, अफ्रीका आदि समेत कई पूर्व व पश्चिम देशों का दौरा कर वहां आध्यात्मिकता की खुशबू फैलाई। उन्होंने आध्यात्मिकता, फिलॉसफी, राजयोग, आर्ट ऑफ लिविंग आदि विषयों मे निपुणता के साथ कई व्याख्यान विदेशों में दिए। वह विचारों मे स्पष्ट, अनुभवों की धनी व बोल मे सादगी का गुण रखती थी, जिस कारण अनेकों ने उनके द्वारा परमात्मा का संदेश पाया। ब्रह्मा बाबा 18 जनवरी, 1969 को अव्यक्त हुए तो वे दादी गुलज़ार के माध्यम से रूहानी बच्चों से मिलने लगे और मुरली सुनाने का माध्यम भी वे ही बनीं। 1969 से 2015 तक गुलजार दादी ने लगातार ब्रह्माकुमारीज सेवाकेन्द्रों का भ्रमण किया व संगमयुग की पावन वेला मे स्व -परिवर्तन पर व्याख्यान दिए।गुलजार दादी वी.आई.पी के सम्मेलनो में शिवबाबा का संदेश अति सरल मगर दिल को छू जाने वाले शब्दों में देतीं थीं। उनका सरल ,भोलापन व सबसे स्नेह रखने वाला स्वभाव ही मुख्य आकर्षण का केंद्र था। उन्होंने सन 2007 से मुख्यतः मधुबन अर्थात माउंट आबू या फिर दिल्ली सेवाकेंद्र पर रहकर सेवा का पार्ट बजाया,11 मार्च 2021 को दादी हृदय मोहिनी यानि गुलज़ार दादी के शरीर छोड़ने के बाद वर्तमान में दादी रतन मोहिनी जी को ब्रह्माकुमारी संस्था की मुख्य प्रशासिका का दायित्व संभाल रही है। जिस दिन उन्होंने अपने शरीर का त्याग किया उस दिन पवित्र महाशिवरात्रि का पवित्र अवसर था। जो उनकी स्मृति को हमेशा हमेशा के लिए यादगार बना गया। (लेखक ब्रह्माकुमारीज संस्था के राजयोग अभ्यासी व वरिष्ठ पत्रकार है) ईएमएस / 10 मार्च 26