बालाघाट (ईएमएस). कलेक्टर मृणाल मीना के निर्देशानुसार जिले में जल आपूर्ति प्रणाली को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने तथा दूषित जल की समय पर पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अमृत रेखा वेब पोर्टल एवं मोबाइल एप के उपयोग को लेकर 19 जनवरी को कलेक्ट्रेट कार्यालय के में जिलास्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न नगरीय निकायों के सहायक यंत्री एवं उपयंत्री शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित जल स्रोतों की नियमित जांच, जल आपूर्ति प्रणाली में लीकेज की पहचान, दूषित जल की त्वरित सूचना, पानी की टंकियों एवं पाइपलाइनों के सर्वे, उन्हें जियो-टैगिंग के माध्यम से मानचित्र पर दर्शाने के लिए अमृत रेखा वेब पोर्टल एवं मोबाइल एप विकसित किया गया है। इस तकनीकी प्लेटफॉर्म के माध्यम से जल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को उपयोगकर्ता निर्माण, सर्वे कार्य की जियो-टैगिंग, रिपोर्ट तैयार करने, डाटा अपलोड करने एवं मानचित्र पर जानकारी प्रदर्शित करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण संयुक्त कलेक्टर एवं परियोजना अधिकारी (जिला शहरी विकास अधिकारी) राहुल नायक की उपस्थिति में आयोजित हुआ, जिसमें ई-दक्ष केंद्र के वरिष्ठ प्रशिक्षक उमाशंकर पटले तथा जिला जीआईएस नोडल अधिकारी पवन शेण्डे द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इसके साथ ही प्रशिक्षण सत्र में भारत सरकार के संचार मंत्रालय द्वारा विकसित कॉल बिफोर यू डिग मोबाइल एप की भी जानकारी दी गई। इस एप के माध्यम से उत्खनन एजेंसियों के पंजीयन, संपत्ति मालिक से संबंधित जानकारी प्राप्त करने तथा आवेदन की स्थिति की ऑनलाइन जांच की प्रक्रिया से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। इस पहल से भूमिगत सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि अमृत रेखा पोर्टल एवं एप के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में जल गुणवत्ता की सतत निगरानी संभव होगी। आमजन को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। भानेश साकुरे / 19 जनवरी 2026