क्षेत्रीय
20-Jan-2026
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- कोर्ट ने माना आरोपी खुद धोखाधड़ी का हुआ है शिकार, फरियादी ने ही की धोखाधड़ी इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने नाबालिग से विवाह, दुष्कर्म के आरोप के बाद पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार आरोपी के जमानत आवेदन पर सुनवाई करते आरोपी को खुद को भी धोखाधड़ी का शिकार होना मान उसे जमानत दे दी। आवेदन सुनवाई दौरान कोर्ट ने माना कि मामले में कई तथ्यों को छिपाया गया था। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि विजय नगर थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत 34 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते आरोप लगाया गया था कि उसने 15 साल की नाबालिग से विवाह किया। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि एफआईआर में यह भी दर्ज किया गया था कि लड़की की शादी उसके चाचा-चाची ने ही करवाई थी और इस दौरान वह अपने पिता से संपर्क नहीं कर सकी थी। कोर्ट में आरोपी के जमानत आवेदन पर सुनवाई दौरान उसके वकीलों ने दलील दी कि वह स्वयं धोखाधड़ी का शिकार है। लड़की की उम्र फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से 1 दिसंबर 2002 बताई थी और उसका नाम भी बदला था। इसी आधार पर विवाह किया गया था। उन्होंने कोर्ट में विवाह के फोटो और वीडियो भी पेश किए जिसमें लड़की विवाह के दौरान खुशी में नाचती दिख रही है। आरोपी के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि फर्जीवाड़े का पता चलते ही उन्होंने राजस्थान के बारां जिले के छीपा बड़ौद थाने में एफआइआर दर्ज करा दी थी। जिसमें बताया था कि लड़की और उसके चाचा-चाची ने न सिर्फ आधार कार्ड में धोखाधड़ी की, बल्कि उससे फोन पे के जरिए 2 लाख 10 हजार रुपए भी लिए। वहीं लड़की ने आरोपी के परिवार को नशीला पदार्थ मिलाकर खाना खिलाया और बाद में जेवर व कीमती सामान लेकर फरार हो गई। आरोपी के वकीलों ने कोर्ट को यह भी बताया कि फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले सह आरोपी को पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। कोर्ट ने तर्कों से सहमत हो यह मानते हुए कि आरोपी तो खुद ही फरियादी द्वारा धोखाधड़ी का शिकार हुआ है उसका जमानत आवेदन स्वीकार करते जमानत दे दी। आनंद पुरोहित/ 20 जनवरी 2026