ज़रा हटके
21-Jan-2026
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वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका की सीनेट में हाल ही में हुई सुनवाई में प्रेग्नेंसी और जेंडर को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। रिपब्लिकन सांसद जोश हॉले ने भारतीय मूल की अमेरिकी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा वर्मा से पूछा कि क्या पुरुष प्रेग्नेंट हो सकते हैं। इसके जबाव में डॉ. निशा ने सीधा हां या ना में उत्तर देने से इंकार किया और इस राजनीतिक सवाल बताया। उन्होंने कहा कि वे इसतरह के मरीजों का इलाज करती हैं जो खुद को महिला नहीं मानते हैं, इसलिए प्रश्न केवल बायोलॉजिकल दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। यह सुनवाई ‘हेल्थ, एजुकेशन, लेबर और पेंशेंट कमेटी’ की थी, जिसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और केमिकल अबॉर्शन दवाओं के संभावित खतरों पर चर्चा करना था। डॉ. निशा डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से गवाही देने पहुंचीं और उन्होंने अबॉर्शन दवाओं के सुरक्षित और प्रभावी होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अबॉर्शन दवाओं पर 100 से ज्यादा वैज्ञानिक शोध हुए हैं और अमेरिका में 2000 के बाद से अब तक 75 लाख से अधिक लोगों ने इन दवाओं का उपयोग कर चुके है। सुनवाई के दौरान सीनेटर हॉले ने बार-बार स्पष्ट उत्तर देने के लिए कह कर जोर दिया कि यह सवाल राजनीति का नहीं, बल्कि बायोलॉजी का है। उनका तर्क था कि प्रेग्नेंट केवल महिलाएं हो सकती हैं, पुरुष नहीं। उन्होंने डॉ. निशा पर बायोलॉजी की बुनियादी सच्चाई को स्वीकार न करने का आरोप लगाकर कहा कि इसतरह में उनकी गवाही पर भरोसा करना मुश्किल है। हॉले ने यह भी दावा किया कि अबॉर्शन दवाओं से 11 प्रतिशत मामलों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, जो कि एफडीए के आंकड़ों से अधिक हैं। इस पर भारतीय मूल की डॉक्टर डॉ. निशा ने जवाब में कहा कि उनका दृष्टिकोण केवल सैद्धांतिक बायोलॉजी तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि हां-ना वाले सवाल अक्सर राजनीतिक उद्देश्य से पूछे जाते हैं और ये मरीजों की वास्तविक स्थिति को सरल तरीके से देखने की कोशिश करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य से जुड़े निर्णय विज्ञान और साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए, लेकिन मरीजों के अनुभवों और उनकी पहचान को भी ध्यान में रखना जरूरी है। सीनेटर हॉले और डॉ. वर्मा के बीच यह बहस जेंडर, प्रेग्नेंसी और स्वास्थ्य अधिकारों के बीच बढ़ते विवाद को उजागर करती है। हॉले की दलील जैविक दृष्टि पर आधारित थी, जबकि डॉ. वर्मा ने बताया कि चिकित्सा निर्णय केवल बायोलॉजिकल तथ्यों पर आधारित नहीं होते, बल्कि मरीजों की पहचान और व्यक्तिगत अनुभव भी महत्वपूर्ण हैं। इस मामले ने अमेरिका में स्वास्थ्य नीति, जेंडर अधिकार और राजनीतिक बहसों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी सामने लाया। यह सुनवाई दिखाती है कि विज्ञान और राजनीति कभी-कभी सीधे तौर पर टकरा सकते हैं और चिकित्सक अक्सर इन सवालों के बीच मरीजों की सुरक्षा और अनुभव को प्राथमिकता देते हैं। आशीष/ईएमएस 21 जनवरी 2026