खेल
21-Jan-2026
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मुम्बई (ईएमएस)। पूर्व क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने कहा है कि भारतीय टीम के लिए अलग-अलग प्रारुपों के लिए अलग कोच बनाये जाने चाहिये। उथप्पा के अनुसार एक ही कोच के लिए हर सीरीज के बाद अपने माइंडसेट को बदलाना आसन नहीं होता है। साथ ही कहा कि आजकल इतना क्रिकेट हो रहा है कि एक कोच मानसिक रुप से थक जाता है। कोच को हर प्रारुप के अनुसारन रणनीति बदलनी पड़ी है और ये काफी कठिन काम होता है। जिस प्रकार से भारतीय टीम उन्यूज़ीलैंड के खिलाफ घरेलू एकदिवसीय सीरीज में हारी है। माना जा रहा है कि उसी को उसको देखते हुए उथप्पा ने ये बयान दिया है। टीम की हार के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर पर भी सवाल उठते है। उनके कोच रहते भारतीय टीम घरेलू टेस्ट सीरीज के बाद एकदिवसीय सीरीज भी हारी है। यह पहली बार था जब न्यूीलैंड टीम भारत में कोई एकदिवसीय सीरीज जीतने में सफल रही। ऐसे में उथप्पा के बयान के बाद गंभीर पर दबाव बढ़ना तय है। उथप्पा का मानना है कि एक ही कोच पर सभी प्रारुपों का बोझ डालना सही नहीं है। उथप्पा ने कहा, मैं अलग-अलग प्रारुपों के लिए अलग कोच रखने के विचार के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। भारत बहुत ज्यादा क्रिकेट खेलता है। एक प्रारुप से दूसरे में जाते वक्त दिमाग भी थक जाता है।उन्होंने साथ ही कहा कि जब कोई कोच एक एक प्रारुप में लीन रहता है तो दूसरे की तैयारी करना कठिन हो जाता है। ऐसे में नये माइंडसेट और उर्जा की जरुरत होती है। एसे में अलग-अलग कोच रहना फायदेमंद रहेगा।उथप्पा ने हालांकि ये भी माना है कि कि अलग-अलग कोच रखने का फैसला करना आसान फैसला नहीं होगा। इसमें सभी कोचों को एक-दूसरे के साथ तालमेल रखते हुए काम करना होगा। अगर उनमें मतभेद रहेगा तो ये टीम के लिए नुकसानदेह रहेगा।उन्होंने कहा कि लगातार संवाद, सही समय पर नेतृत्व और पीछे हटने की समझ बेहद जरूरी है। यह तभी संभव है जब सोच किसी बड़ी और मजबूत संरचना को बनाने की हो। गिरजा/ईएमएस 21 जनवरी 2026