-सोना-चांदी नई ऊंचाई पर, रुपये का अवमूल्यन भारत का वित्तीय बाजार इन दिनों अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। एक ओर शेयर बाजार में लगातार गिरावट से निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ सोने और चांदी की कीमतें रोजाना नया रिकॉर्ड बना रही हैं। इसी बीच डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में लगातार गिरावट होने से भारत में महंगाई और आयातित सामान की लागत बढ़ने से नई चिंताएं खड़ी हो गई हैं। शेयर बाजार में पिछले कुछ सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन-चार सत्रों में 20 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया और यूरोप में भू-राजनीतिक तनाव तथा भारत के शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। आईटी, बैंकिंग और मेटल जैसे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में मुनाफा वसूली से छोटे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। संस्थागत वित्तीय निवेशकों को भी भारी नुकसान हुआ है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है, जब तक वैश्विक स्तर पर इस तरह की अराजकता देखने को मिल रही है, तब तक बाजार में यह उतार-चढ़ाव बना रहेगा। शेयर बाजार की इस स्थिति को देखते हुए सोना और चांदी को सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जा रहा है। वही शेयर बाजार की गिरावट से बैंकिंग सेक्टर में भी जिस तरह की स्थिति देखने को मिल रही है, ऐसी स्थिति में निवेशक बैंक और शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर सोने एवं चांदी में निवेश कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी के दाम निरंतर बढ़ रहे हैं। चीन से सबसे ज्यादा चांदी का निर्यात होता है। चीन सरकार ने चांदी के निर्यात पर लाइसेंस प्रणाली लागू कर दी है, जिसके कारण चांदी में भारी तेजी देखने को मिल रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से घरेलू बाजार में सोना महंगा होता जा रहा है। चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल बना हुआ है। चांदी की औद्योगिक मांग और निवेश दोनों में मांग बढ़ रही है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है, ट्रंप के टैरिफ एवं उनकी आक्रामक नीतियों के कारण आर्थिक जगत में वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। रिजर्व बैंक यदि बैंक ब्याजदरों में कटौती करता है तो ऐसी स्थिति में, आने वाले महीनों में सोने-चांदी की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। सोने एवं चांदी में जिस तरह से सट्टेबाजी बढ़ गई है, उसके कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार कमजोर होना, भारत की आर्थिक स्थिति को और भी गंभीर बना रहा है। कच्चे तेल, खाद्य तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान, आयातित उत्पाद लगातार महंगे हो रहे हैं। रुपये के अवमूल्यन से निर्यातकों को राहत जरूर मिली है, लेकिन आयात के मुकाबले भारत का निर्यात बहुत कम है। आम उपभोक्ता के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार में यदि सुधार नहीं हुआ, डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत नहीं हुआ, रुपये पर इसी तरह का दबाव यदि आगे भी बना रहा तो भारत के लिए आर्थिक स्थिति बहुत चिंतनीय होगी। कुल मिलाकर, भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने यह समय सबसे चुनौतीपूर्ण है। शेयर बाजार की गिरावट से निवेशकों विशेष रूप से बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान हुआ है। आने वाले समय में सरकार की नीतियां, नए साल का बजट रिजर्व बैंक की नीतियां और वैश्विक परिस्थितियां भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनकर सामने आ रही हैं। यह अस्थिरता कब तक बनी रहेगी कहना मुश्किल है। ईएमएस/21/01/2026