मुंबई,(ईएमएस)। मुंबई का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले उसकी ऊंची इमारतों और दौड़ती जिंदगी आती है। लेकिन, मुंबई की पहचान सिर्फ इतनी नहीं है। यहां के पुराने ईरानी कैफे भी मुंबई को उसकी खास पहचान देते हैं। इन पुराने ईरानी कैफे में बी. मेरवान एंड कंपनी की खास जगह है, जहां का मावा केक और बन मस्का हर मुंबईकर को खूब पसंद है। लेकिन मुंबईवासियों के लिए एक भावुक आई है। दक्षिण मुंबई के ग्रांट रोड रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित शहर का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित ईरानी कैफे, बी. मेरवान एंड कंपनी अब हमेशा के लिए बंद हो गया है। इस ऐतिहासिक कैफे के बंद होने की खबर किसी आधिकारिक प्रेस रिलीज से नहीं, बल्कि दुकान के शटर पर चिपकी एक साधारण हाथ से लिखी पर्ची से मिली। 1 जनवरी, 2026 की तारीख वाली पर्ची पर लिखा था- हम बंद हैं। आपके साथ के लिए हम आपको धन्यवाद देते हैं। मालिकों की ओर से इसके पीछे के कारणों का कोई खुलासा नहीं किया गया है। इस कैफे की नींव 1914 में बोमन मेरवान नजराबादी ने रखी थी। एक सदी से भी ज्यादा समय तक, यह कैफे न केवल खाने के लिए, बल्कि अपनी पुरानी दुनिया के आकर्षण के लिए मशहूर था। सुबह की ट्रेन पकड़ने वाले यात्रियों से लेकर मोहल्ले के नियमित ग्राहकों तक, यह कैफे हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बना था। बी. मेरवान की लोकप्रियता का राज उसका सीधा-सादा लेकिन लाजवाब मेनू था। यहां की सबसे खास चीजें थीं मावा केक.........जो सुबह-सुबह ही कुछ ही घंटों में बिक जाते थे। बन मस्का और कड़क ईरानी चाय, जिस चाय को पीकर लोग अपनी थकान मिटाते थे। इसके अलावा मावा समोसा, जैम पफ, खारी बिस्कुट और साधारण अंडे के व्यंजन। एक युग का अंत यह पहली बार नहीं है जब इस कैफे पर ताला लगा है। इससे पहले 2014 में भी यह मरम्मत के लिए कुछ समय के लिए बंद हुआ था, लेकिन तब यह फिर से खुल गया था। कैफे के बंद होने की खबर के आते ही सोशल मीडिया पर लोग इस कैफे से जुड़ी अपनी बचपन की यादें शेयर कर रहे हैं, कोई अपने पेरेंट्स के साथ मावा केक खाने की यादें ताजा कर रहा है, तो कोई दशकों पुरानी चाय की उस आदत को याद कर रहा है। बी. मेरवान एंड कंपनी भले ही बंद हो गई हो, लेकिन इसकी यादें उन लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी जो कभी इसके दरवाजों से अंदर दाखिल हुए थे। आशीष दुबे / 21 जनवरी 2026