राष्ट्रीय
21-Jan-2026


कानपुर,(ईएमएस)। आईआईटी कानपुर में लगातार हो रही आत्महत्याओं की घटनाओं ने संस्थान की कार्यप्रणाली और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। एक और रिसर्च स्कॉलर ने आत्महत्या कर ली, जिससे माहौल और गंभीर हो गया। घटना के बाद मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेकर आईआईटी कानपुर से जवाब तलब कर 22 जनवरी तक जवाब देने का आदेश दिया है। आयोग ने दिसंबर में हुई आत्महत्या के मामले को पहले दायर याचिका के साथ जोड़ने का निर्णय लिया है, साथ ही राम स्वरूप इश्राम की आत्महत्या को भी उसी याचिका में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। घटना के बाद आईआईटी कानपुर कैंपस में छात्रों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। लगातार हो रही घटनाओं के कारण छात्र असंतोष में हैं और संस्थान से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस आत्महत्या के बाद छात्रों ने जनरल बॉडी मीटिंग बुलाई, लेकिन जब स्टूडेंट्स एसोसिएशन के डीन बैठक में नहीं पहुंचे, तब छात्रों ने उनके आवास के बाहर प्रदर्शन किया और घेराव कर लिया। छात्रों का कहना है कि पिछले दो साल में नौ छात्रों की मौत हो चुकी है, लेकिन संस्थान की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस स्थिति ने संस्थान और छात्र समुदाय के बीच तनाव बढ़ा दिया है। मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर ध्यान न देने के कारण छात्रों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक दबाव, शोध कार्य की चुनौतियाँ और उचित समर्थन न मिलने के कारण छात्र अत्यधिक मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। अब मानवाधिकार आयोग की निगरानी और संस्थान की जवाबदेही से यह स्थिति संभाली जा सकती है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके। आशीष दुबे / 21 जनवरी 2026