राष्ट्रीय
22-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत में हर साल 70 हजार से ज्यादा रॉन्ग साइड ड्राइविंग के चालान काटे जाते हैं। दिल्ली, गुरुग्राम और मुंबई जैसे महानगरों में यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। दुनिया भर में सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है और रॉन्ग साइड ड्राइविंग इस समस्या का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है। भारत जैसे देश में यह समस्या बेहद गंभीर है। सड़क परिवहन मंत्रालय की 2023-24 की रिपोर्ट बताती है कि गलत दिशा में वाहन चलाना भारत में सड़क हादसों की एक बड़ी वजह है। हाल के वर्षों में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि 2025-26 से कुछ शहरों में रॉन्ग साइड ड्राइविंग को आपराधिक अपराध मानते हुए एफआईआर दर्ज की जाने लगी है। वर्तमान में भारत में इस उल्लंघन पर आमतौर पर 5,000 रुपये का चालान है, जबकि कुछ शहरों में इसे खतरनाक ड्राइविंग मानकर 5,500 रुपये या उससे अधिक का जुर्माना भी लगाया जा रहा है। कई मामलों में छह महीने तक की जेल और वाहन जब्ती का प्रावधान भी लागू किया जा रहा है। अगर दुनिया के सबसे असुरक्षित ड्राइविंग वाले देशों की बात करें तो दक्षिण अफ्रीका का नाम सबसे ऊपर आता है। यहां ट्रैफिक नियमों का पालन बेहद कमजोर माना जाता है। गलत दिशा में गाड़ी चलाना, खतरनाक ओवरटेकिंग और तेज रफ्तार आम बात है। हर साल सड़क हादसों में यहां 10,000 से 12,000 लोगों की मौत हो जाती है, जो औसत के लिहाज से दुनिया में सबसे ज्यादा मानी जाती है। दुर्घटनाओं की बड़ी वजह शराब पीकर गाड़ी चलाना है, जिसमें 57 से 58 फीसदी मामले शामिल होते हैं। पैदल यात्री सबसे ज्यादा शिकार होते हैं, जिनकी हिस्सेदारी 40 फीसदी से ज्यादा है। एशियाई देशों में थाईलैंड खासतौर पर मोटरसाइकिल चालकों की वजह से खतरनाक माना जाता है। यहां गलत लेन में बाइक चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं में मृत्यु दर काफी ऊंची है। इंडोनेशिया में अत्यधिक भीड़ और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण लोग शॉर्टकट के लिए अक्सर गलत दिशा में वाहन चला लेते हैं। रूस और जॉर्जिया जैसे देशों में भी रॉन्ग साइड ड्राइविंग से हादसों का जोखिम अधिक देखा गया है। यूरोप में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां नियम सख्त हैं और चालान की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बेल्जियम ने 2024 में 92 लाख से ज्यादा ट्रैफिक उल्लंघन दर्ज किए, जिनमें से 76 लाख से अधिक ओवरस्पीडिंग के थे। आबादी के हिसाब से यह आंकड़ा काफी बड़ा माना जाता है। नीदरलैंड, फ्रांस और बेल्जियम जैसे देशों में प्रति व्यक्ति स्पीडिंग चालान की संख्या यूरोप में सबसे ज्यादा है। दुनिया का सबसे महंगा ट्रैफिक चालान स्विट्जरलैंड में लगाया जाता है। यहां एक मामले में ओवरस्पीडिंग करने पर करीब 90,000 स्विस फ्रैंक, यानी लगभग 90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। स्विट्जरलैंड में ‘डे फाइन सिस्टम’ लागू है, जिसमें जुर्माना व्यक्ति की आय के आधार पर तय होता है। इसका मकसद यह है कि सजा अमीर और गरीब दोनों के लिए बराबर दर्दनाक हो। यहां कानून बेहद सख्त हैं और पैदल यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि मानी जाती है। अगर सबसे बेहतर और अनुशासित ड्राइविंग वाले देश की बात करें तो स्वीडन को दुनिया में नंबर एक माना जाता है। यहां हर एक लाख लोगों पर सड़क हादसों में सिर्फ दो मौतें होती हैं। सुदामा/ईएमएस 22 जनवरी 2026