अंतर्राष्ट्रीय
22-Jan-2026
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-दावोस में 66 देशों के सर्वे में किया बड़ा दावा, हर चार में से एक को भरपेट भोजन नहीं मिलता दावोस,(ईएमएस)। ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 अरबपतियों के लिए बेहद मुनाफे वाला रहा है। उनकी कुल संपत्ति में 16 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह आंकड़ा 18.3 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 1,660 ट्रिलियन) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। पिछले पाँच वर्षों के औसत की तुलना में यह वृद्धि तीन गुना तेज है। रिपोर्ट में एक विचलित करने वाला विरोधाभास पेश किया गया है कि एक ओर जहाँ दुनिया में हर चार में से एक व्यक्ति को भरपेट भोजन नहीं मिलता और लगभग आधी आबादी गरीबी में जीवन बिता रही है, वहीं अरबपतियों की संख्या पहली बार 3,000 के पार पहुँच गई है। ईलॉन मस्क दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए हैं जिनकी व्यक्तिगत संपत्ति 500 अरब डॉलर से अधिक हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल पिछले वर्ष ही अरबपतियों की संपत्ति में 2.5 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ, जो इतनी बड़ी राशि है जिससे पूरी दुनिया से 26 बार अत्यधिक गरीबी मिटाई जा सकती है। स्विट्जरलैंड के बर्फीले शहर दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) 2026 की वार्षिक बैठक शुरू होने वाली है, जहाँ दुनिया भर के अमीर और ताकतवर नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चर्चा के लिए एकजुट हो रहे हैं। इसी महत्वपूर्ण अवसर पर ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट जारी की है, जिसने वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक असमानता पर गहरी चिंता जताई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे मुट्ठी भर लोगों की बढ़ती ताकत आम आदमी के अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए खतरा बनती जा रही है। आर्थिक असमानता के साथ-साथ रिपोर्ट में राजनीतिक कब्ज़े पर भी प्रकाश डाला गया है। सर्वे के अनुसार, अरबपतियों के राजनीतिक पदों पर पहुँचने की संभावना एक सामान्य व्यक्ति की तुलना में 4,000 गुना अधिक है। 66 देशों में किए गए सर्वे में लगभग आधे लोगों ने माना कि अमीर लोग चुनाव खरीद लेते हैं। रिपोर्ट में अमेरिकी प्रशासन की नीतियों का भी उल्लेख किया गया है, जहाँ टैक्स में कटौती और बड़ी कंपनियों पर नरमी बरतने से सुपर-रिच वर्ग की संपत्ति में भारी उछाल आया। ऑक्सफैम के कार्यकारी निदेशक अमिताभ बेहर ने इस स्थिति को खतरनाक करार देते हुए कहा कि आर्थिक गरीबी जहाँ भूख पैदा करती है, वहीं राजनीतिक गरीबी समाज में गुस्से को जन्म देती है। रिपोर्ट के अनुसार, असमानता के कारण दुनिया के 68 देशों में 142 से अधिक बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। इसके अतिरिक्त, यह भी चिंता जताई गई है कि दुनिया की आधी से अधिक बड़ी मीडिया कंपनियां और सोशल मीडिया मंच अरबपतियों के नियंत्रण में हैं, जो सूचनाओं के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। ऑक्सफैम ने सरकारों से पुरजोर मांग की है कि वे सुपर-रिच पर विशेष टैक्स लगाएं, धन और राजनीति के बीच एक मजबूत दीवार खड़ी करें और ट्रेड यूनियनों तथा आम लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए ठोस योजनाएं बनाएं। वीरेंद्र/ईएमएस 22 जनवरी 2026