-अमेरिकी स्पेस शटल प्रोग्राम के बंद होने के बाद नासा रूसी रॉकेट पर हो गया था निर्भर वॉशिंगटन,(ईएमएस)। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने कई मौके पर नासा की मदद की है, जब दूसरे स्पेसक्राफ्ट या तो तकनीकी रूप से असफल रहे या मिशन में फंस गए। सुनीता विलियम्स के सुरक्षित रेस्क्यू से लेकर अंतरिक्ष स्टेशन से पहली मेडिकल इमरजेंसी में वापसी तक, स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल ने यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष में मानव जीवन की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एलन मस्क ने साल 2002 में स्पेसएक्स की शुरुआत इस उद्देश्य से की थी कि अंतरिक्ष यात्रा को सस्ता, सुरक्षित और दोबारा इस्तेमाल करने योग्य बनाया जा सके। 2011 में अमेरिका के स्पेस शटल प्रोग्राम के बंद होने के बाद नासा को रूसी सोयुज रॉकेट पर निर्भर रहना पड़ा। इस दौर में स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल सामने आया, जिसने 2020 से अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक ले जाना शुरू किया। इससे अमेरिका को एक बार फिर स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता मिली और संकट के समय एक भरोसेमंद विकल्प भी। साल 2024 में भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से आठ दिन के मिशन पर गए थे, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते वे करीब नौ महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर फंस गए। थ्रस्टर फेल होने और हीलियम लीक जैसी समस्याओं ने उनकी वापसी को असंभव बना दिया। आखिरकार नासा ने स्टारलाइनर को खाली लौटाने का फैसला किया और स्पेसएक्स के क्रू-9 मिशन के जरिए दोनों एस्ट्रोनॉट्स को मार्च 2025 में सुरक्षित धरती पर वापस लाया गया। लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा होता है, ऐसे में यह रेस्क्यू मिशन जीवनरक्षक साबित हुआ। इसके बाद 2025-26 में स्पेसएक्स ने एक और ऐतिहासिक भूमिका निभाई, जब अंतरिक्ष स्टेशन के 25 साल के इतिहास में पहली बार मेडिकल इवैक्यूएशन की जरूरत पड़ी। क्रू-11 मिशन के दौरान एक एस्ट्रोनॉट की तबीयत बिगड़ने पर नासा ने मिशन को तय समय से पहले खत्म करने का फैसला किया। जनवरी 2026 में ड्रैगन कैप्सूल के जरिए सभी एस्ट्रोनॉट्स को सुरक्षित वापस लाया गया। यह पहली बार था जब अंतरिक्ष स्टेशन से मेडिकल आधार पर तत्काल वापसी संभव हुई। स्पेसएक्स की सफलता के पीछे उसकी इंजीनियरिंग-केंद्रित सोच, तेज निर्णय क्षमता और रीयूजेबल टेक्नोलॉजी है, जिससे लागत कम और विश्वसनीयता ज्यादा हुई। इसके उलट, बोइंग का स्टारलाइनर प्रोजेक्ट तकनीकी खामियों, देरी और लागत बढ़ने की समस्या से जूझता रहा है। नासा की सरकारी प्रक्रियाएं, फंडिंग में अनिश्चितता और प्रशासनिक जटिलताएं भी इन देरी की बड़ी वजह रहीं। आज स्थिति यह है कि नासा कई अहम मानव मिशनों के लिए स्पेसएक्स पर निर्भर है। सिराज/ईएमएस 22 जनवरी 2026