राज्य
22-Jan-2026
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- दक्षिण पश्चिम से नरेला विधानसभा डायवर्ट हुए 18 करोड रुपए - रविंद्र भवन की रौनक पर भारी नाला, भाजपा की गुटबाजी में बह गए 18 करोड़ भोपाल (ईएमएस)। राजधानी भोपाल में विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर राजनीति गर्मा गई है। दक्षिण पश्चिम विधानसभा में विकास के नाम पर हुए कथित भेदभाव ने भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी को उजागर कर दिया है। मामला 18 करोड़ रुपये की उस राशि से जुड़ा है, जो रविंद्र भवन के पास बाणगंगा से निकलने वाले नाले के निर्माण और सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत की गई थी, लेकिन बाद में इस राशि को दक्षिण पश्चिम विधानसभा से डायवर्ट कर नरेला विधानसभा भेज दिया गया। दक्षिण पश्चिम विधानसभा के वार्ड क्षेत्र में स्थित रविंद्र भवन सभागार राजधानी का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और शासकीय केंद्र है। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं, जिनमें विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री तक शामिल होते हैं। इसके बावजूद सभागार के समीप खुला नाला इस प्रतिष्ठित परिसर के लिए वर्षों से “सफेद चांद में काले दाग” की तरह मौजूद है। नाले से उठने वाली दुर्गंध न केवल कार्यक्रमों की गरिमा को प्रभावित करती है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी परेशानी का सबब बनी हुई है। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस नाले के निर्माण कार्य के लिए 18 करोड़ रुपये की लागत से भूमि पूजन और शिलान्यास किया गया था। कार्य का जिम्मा नगर निगम भोपाल को सौंपा गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि न तो कार्य शुरू हुआ और न ही नाले की स्थिति बदली। वर्ष 2026 तक आते-आते नाला जस का तस बना हुआ है, जबकि राशि नरेला विधानसभा में खर्च होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। दक्षिण पश्चिम विधानसभा के विधायक भगवान दास सबनानी हैं, जबकि भोपाल नगर निगम की महापौर मालती राय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के गुट से जुड़ी मानी जाती हैं। आरोप है कि इसी राजनीतिक खींचतान के चलते दक्षिण पश्चिम विधानसभा के विकास कार्यों को नजरअंदाज किया गया। हाल ही में रविंद्र भवन में लोक निर्माण विभाग का एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। प्रदेश भर से आए अधिकारियों को नाले से उठती बदबू के कारण भोजन तक नहीं कर पाने की स्थिति बनी। इसके बाद यह मामला फिर से तूल पकड़ने लगा है। इस संबंध में विधायक भगवान दास सबनानी का कहना है कि नगर निगम ने इस नाले को लेकर प्रस्ताव बनाया था और इसमें बड़ी राशि खर्च होनी थी। रविंद्र भवन एक ऐसा केंद्र है जहां रोज गतिविधियां होती हैं, इसलिए चाहे आम लोग आएं या विशेष अतिथि, किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि नगर निगम जल्द इस पर कार्रवाई करेगा। फिलहाल सवाल यही है कि जब भूमि पूजन दक्षिण पश्चिम विधानसभा में हुआ, तो विकास की धारा नरेला की ओर कैसे मुड़ गई। क्या यह महज तकनीकी निर्णय है या फिर राजनीति की नाली में बहता विकास?