राज्य
22-Jan-2026
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इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में कानून के रखवालों पर ही गंभीर आरोप लगे हैं, जिसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। जिला अदालत के आदेश के बाद, एमआईजी (MIG) पुलिस थाने के नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक टीबी मरीज को झूठे मामले में फंसाने और उसकी बाद में जेल में हुई मौत के मामले में जांच शुरू की गई है। मामला क्या है? पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, मृतक युवक अजय को पुलिसकर्मियों ने बिना किसी वैध गिरफ्तारी वारंट या एफआईआर के उसके घर से उठा लिया था। आरोप है कि पुलिस ने अजय को ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थ का तस्कर बताकर अवैध हिरासत में रखा। अजय के परिवार का दावा है कि वह गंभीर रूप से टीबी से पीड़ित था और उसकी स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत नाजुक थी। पुलिस पर यह भी आरोप है कि उन्होंने इस मामले को रफा-दफा करने या छोड़ने के एवज में परिवार से कथित तौर पर पैसे की मांग की थी। जब परिवार ने उनकी मांग पूरी नहीं की, तो पुलिसकर्मियों ने अजय को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज दिया। न्यायिक हस्तक्षेप के बाद शुरू हुई कार्रवाई - जेल में रहने के दौरान अजय की तबियत और बिगड़ गई, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद, जब पुलिस विभाग ने अपने स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो पीड़ित परिवार ने हार नहीं मानी और न्याय के लिए जिला अदालत का रुख किया। अदालत ने मामले की गंभीरता और पुलिसकर्मियों पर लगे संगीन आरोपों को संज्ञान में लेते हुए, संबंधित 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, राज्य के लोकायुक्त संगठन ने भी इस पूरे प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए एक समानांतर जांच शुरू की है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी दोषी अधिकारी बच न पाए और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। विगत कुछ दिनों से इन्दौर पुलिसकर्मियों के इस तरह के उजागर हुए कई मामलों के साथ यह मामला भी पुलिस की जवाबदेही और शक्ति के दुरुपयोग के इर्द-गिर्द कई सवाल खड़े करता है।