अंतर्राष्ट्रीय
22-Jan-2026


दावोस (ईएमएस)। दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) 2026 के दौरान तकनीकी जगत के कई दिग्गजों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर फैल रही आशंकाओं पर विराम लगाने की कोशिश की। तकनीकी विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि एआई इंसानों की नौकरियां नहीं छीनेगा, बल्कि काम करने के तरीकों को अधिक प्रभावी और बेहतर करेगा। इस मौके पर वर्करा के संस्थापक और सीईओ कियान कटानफोरूश ने कहा कि एआई को लेकर इस्तेमाल होने वाली भाषा बेहद अहम है। उन्होंने एआई को “सहकर्मी” कहने पर आपत्ति जताकर स्पष्ट किया कि एआई केवल कुछ तयशुदा कार्यों में दक्ष हो सकता है, जबकि इंसान एक साथ कई तरह की जिम्मेदारियां निभाता है। उनके अनुसार, अब तक यह आशंका गलत साबित हुई है कि एआई बड़े पैमाने पर नौकरियों को खत्म कर देगा। इसी दौरान हिप्पोक्रेटिक एआई के सह-संस्थापक और सीईओ मुंजाल शाह ने कहा कि भविष्य में एआई कर्मचारियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में “8 अरब लोग और 80 अरब एआई सिस्टम” होने हैं, जो नए और जटिल कामों को आसान बनाएंगे। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि कैसे एआई ने गर्मी की लहर के दौरान हजारों लोगों को फोन कर स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी। अमिनी की संस्थापक और सीईओ केट कैलॉट ने एआई को एक उपकरण बताकर कहा कि इसमें सही-गलत का नैतिक निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती। वहीं, बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के सीईओ क्रिस्टोफ श्वाइजर ने कहा कि एआई के साथ काम करना कभी-कभी किसी सहकर्मी जैसा अनुभव देता है, लेकिन कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने काम करने के तरीके को कितना बदलती है। एचपी के सीईओ एनरिक लोरस ने कहा कि एआई का संतुलित उपयोग जरूरी है। उन्होंने माना कि एआई कभी-कभी गलत जवाब देता है, लेकिन कुल मिलाकर इससे सटीकता और ग्राहक संतुष्टि दोनों में सुधार हुआ है। कुल मिलाकर, डब्ल्यूईएफ 2026 में यह संदेश साफ रहा कि एआई डर का नहीं, समझदारी से अपनाने का विषय है। आशीष दुबे / 22 जनवरी 2026