अंतर्राष्ट्रीय
22-Jan-2026


-60 देशों को न्योता भेजा 20 पहुंचे, पाकिस्तानी पीएम मौजूद थे, भारत से कोई नहीं, दोहा - पाकिस्तान, सऊदी समेत 8 मुस्लिम देशों ने स्वीकारा ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण दावोस(ईएमएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को दावोस में जंग सुलझाने के लिए बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस को लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि इस बोर्ड का शुरुआती मकसद गाजा में हुए युद्धविराम को मजबूत करना है, लेकिन आगे चलकर यह दूसरे ग्लोबल विवादों में भी भूमिका निभा सकता है। व्हाइट हाउस ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए 60 देशों को न्योता भेजा था, लेकिन सिर्फ 20 देश ही हस्ताक्षर समारोह में मौजूद रहे। इसमें पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ के अलावा सऊदी अरब, कतर यूएई, अर्जेंटीना और पराग्वे के नेता मौजूद थे। भारत से कोई हस्ताक्षर समारोह में शामिल नहीं हुआ। वहीं अमेरिका के सहयोगी माने जाने वाले ज्यादातर यूरोपीय देश भी इस समारोह से गायब रहे। पहले माना जा रहा था कि कार्यक्रम में 35 देशों के नेता शामिल हो सकते हैं। ट्रम्प ने पिछले साल सितंबर 2025 में पहली बार गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। आठ प्रमुख मुस्लिम देशों ने मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के अपने फैसले की घोषणा की। सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में से हर देश दुनिया के नेताओं के पैनल में एक प्रतिनिधि नियुक्त करेगा। 8 देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान में यह घोषणा की। ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में हृ की भूमिका कमजोर हो सकती है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह हृ के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हृ में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। रूस ने कहा है कि वह इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। फ्रांस ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है। ब्रिटेन ने कहा है कि फिलहाल वह बोर्ड में शामिल नहीं होगा। चीन ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वह इसमें शामिल होगा या नहीं। ट्रम्प का दावा- पुतिन गाजा पीस बोर्ड में शामिल होंगे ट्रम्प ने दावा किया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने यह बयान स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान दिया। पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि पुतिन को न्योता दिया गया था और उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है। दूसरी तरफ पुतिन ने कहा है कि बोर्ड में औपचारिक भागीदारी पर अंतिम फैसला रणनीतिक साझेदारों से सलाह के बाद ही लिया जाएगा। गाजा पीस बोर्ड को रूस 1 अरब डॉलर देगा रूस ने गाजा पीस बोर्ड को 1 अरब डॉलर देने की पेशकश की है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भले ही बोर्ड में उसकी औपचारिक भागीदारी पर अंतिम फैसला न हुआ हो, लेकिन वह 1 अरब डॉलर देने पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह पैसा उस रूसी संपत्ति से लिया जा सकता है, जिसे अमेरिका ने पिछली सरकार के दौरान फ्रीज कर दिया था। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इन्हीं प्रतिबंधों के तहत अमेरिका और यूरोप में रूस के सेंट्रल बैंक और सरकारी फंड से जुड़ी अरबों डॉलर की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया था। इन पैसों पर रूस का मालिकाना हक तो बना रहता है, लेकिन वह बिना अमेरिकी मंजूरी के इनका इस्तेमाल नहीं कर सकता। पुतिन अब इसी फ्रीज संपत्ति से गाजा पीस बोर्ड को 1 अरब डॉलर देने की बात कर रहे हैं। गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में पहुंचा सीजफायर के बाद गाजा पीस प्लान अब दूसरे चरण में पहुंच चुका है। ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा के गठन का ऐलान किया है। इस कमेटी की देखरेख करने, फंड जुटाने जैसे कामों के लिए ट्रम्प ने बोर्ड ऑफ पीस (शांति बोर्ड) का गठन किया गया है। ट्रम्प खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। इसके अलावा गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया गया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने पिछले हफ्ते कहा था कि गाजा के लिए बनाए गए नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा अमेरिका ने इजराइल से बिना बातचीत किए की है। इजराइल का कहना है कि यह फैसला उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से नाराजगी इजराइल ट्रम्प के पीस बोर्ड को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुका है। नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को कार्यकारी बोर्ड की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है। पीस बोर्ड के हर सदस्य की अपनी तय जिम्मेदारी होगी व्हाइट हाउस ने कहा कि एग्जीक्यूटिव बोर्ड का हर सदस्य गाजा की स्थिरता और लंबे समय की सफलता से जुड़े एक तय पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभालेगा। इसमें शासन क्षमता बढ़ाना, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, फंडिंग और पूंजी जुटाना शामिल है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में बोर्ड ऑफ पीस और गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के और सदस्यों की घोषणा की जाएगी। एनसीएजी डॉ. अली शाथ के नेतृत्व में काम करेगी। डॉ. शाथ एक तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्नोक्रेट) हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अली शाथ गाजा में बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं (जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा) को बहाल करने, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करने और रोजमर्रा की जिंदगी को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। विनोद उपाध्याय / 22 जनवरी, 2026