वाराणसी (ईएमएस)। अंतर्राष्ट्रीय धर्म चक्र पूजा सारनाथ, वाराणसी के आखिरी दिन आज 21 जनवरी, 2026 को वर्मा, थाईलैंड, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, तिब्बत,जापान इत्यादि देशों से आए हुए भी भीखु संघ नें मूलगंध कुटी बिहार में बुद्ध वंदना एवं त्रिशरण पाठ किया। इसके पश्चात भीखु संघ नें मूलगंध कुटी विहार से धम्मेख स्तूप तक धम्म चारिका की तथा करुणा के सागर तथागत भगवान बुद्ध की जो प्राचीन पूजा स्थल रही, वहां पर भिक्षु संघ ने पूजा, पाठ एवं वंदन किया। धम्मेख स्तूप की परिक्रमा करने के पूर्व भीखु संघ को भोजन दान किया गया। भिक्षु संघ को दान करने के लिए कार्यक्रम स्थल पर लगभग दो दर्जन स्टाल लगाए गए थे। यहां तिब्बतन इंस्टीट्यूट, थाईलैंड, धम्मा लर्निंग सेंटर, सार्थक सर्जिकल, डॉक्टर बी आर अंबेडकर जन जागरण उत्थान समिति, संघ रत्न मेमोरियल, महाबोधि इंटर कॉलेज इत्यादि संस्थाओं के स्टाल लगाये गये थे, जहां से भिक्षु संघ को फल -फूल के अलावा दैनिक उपयोग की चीज़े साबुन, तेल, टूथब्रश, पेस्ट, बिस्किट, नमकीन,ड्राई फ्रूट इत्यादि वस्तुएं दान की गई। इसके पश्चात महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया भारत के अध्यक्ष शिवली भंते महाथेरो एवं वाराणसी के अध्यक्ष सुमिथानंद महाथेरो तथा धम्मा लर्निंग सेंटर के पूराधिपति चँदिमा भंते थेरों के नेतृत्व में मूलगढ़ कुटी विहार में एक धम्म सभा का आयोजन किया गया।धर्म सभा को संबोधित करते हुए पूज्य चँदिमा भंते नें विदेश के बौद्ध विहारों से आए हुए तमाम भिक्षु संघ के प्रति आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा की सारनाथ में यह 40 वर्षों के बाद पहला अवसर है, जब विभिन्न देशों के बौद्ध विहारों के भिक्षुगण एक छत्र के नीचे एकत्र होकर करुणा के सागर भगवान बुद्ध की बुद्ध वंदना त्रिशरण पाठ एवं उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में बौद्ध धर्म के हीनयान, महायान,वज्रयान तथा सभी बौद्ध मतावलंबी एकत्र हुए तथा सबने एक स्वर में बौद्ध धर्म को भारत में तथा विदेश तक इसके प्रचार प्रसार का संकल्प लिया। पूज्य चँदिमा भंते नें कहा कि बौद्ध धर्म का जिस ढंग से जन-जन में प्रचार होना चाहिए, वह नहीं हो पा रहा है। करुणा के सागर तथागत बुद्ध ने इस धर्म की स्थापना बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय, लोक अनुकंपाय के लिए की थी तथा आज दुनिया में विश्व शांति के लिए बौद्ध धर्म की ही आवश्यकता है। उन्होंने इस सात दिवसीय कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी भीखु संघ के अलावा भंते पदुम, भंते अस्स, संजय मौर्य, सोमारु प्रधान, आर के निगम, मंजू चौधरी, मंसाराम, श्री राम, कृष्णायन, आर के प्रसाद, एस पी राम, बृजेश भारती, सुनील कौशल, डॉ. विनोद कुमार इत्यादि लोगों के सक्रिय रूप से सहभागिता कर इस अंतरराष्ट्रीय धर्म चक्र सम्मेलन को संपन्न कराने को साधुवाद दिया। डॉ नरसिंह राम / 22 जनवरी 26