अंतर्राष्ट्रीय
22-Jan-2026


- ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र पर एक भविष्य के समझौते का फ्रेमवर्क तय करने पर बनी सहमति दावोस(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे ने स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान एक द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक उस समय हुई जब ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने और नियंत्रण की बात करते हुए विवाद खड़ा कर दिया था। कई यूरोपीय नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया और तनाव बढ़ गया था। लेकिन दावोस में इस मुलाकात के बाद ट्रंप का यूरोप और नाटो को लेकर गुस्सा शांत नजर आया और ट्रंप यूरोपीय देशों पर लगाए गए 10 फीसदी टैरिफ से पीछे हट गए। रुट्टे और ट्रंप की बातचीत का केंद्र ग्रीनलैंड को लेकर नियंत्रण का विवाद नहीं था, बल्कि पूरे आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता थी। रुट्टे ने स्पष्ट किया कि बातचीत में ग्रीनलैंड की संप्रभुता या इसे डेनमार्क से अलग करने का मुद्दा नहीं उठाया गया। दोनों नेताओं ने आर्कटिक के बढ़ते वैश्विक तनाव, रूस-चीन की बढ़ती गतिविधियों और नाटो सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया है। इस बैठक के बाद ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने रुट्टे के साथ एक भविष्य के समझौते का फ्रेमवर्क तय किया है, जो ग्रीनलैंड और व्यापक आर्कटिक क्षेत्र में नाटो सहयोग को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता अमेरिका और नाटो देशों दोनों के हित में है और इसी वजह से उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगने वाले टैरिफ की धमकी वापस ले ली। ट्रंप ने कहा कि वे एक फरवरी से लागू होने वाले 10 फीसदी टैरिफ को लगाना नहीं चाहते। इससे पहले वे यूरोपीय देशों को यह टैरिफ लगा देने की चेतावनी दे रहे थे, अगर ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात नहीं मानी गई। उन्होंने यह भी कहा कि वे सेना का इस्तेमाल नहीं करेंगे और परिस्थितियों को कूटनीति से संभालना चाहते हैं। बता दें कि यह टैरिफ एक फरवरी से लगने वाला था। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप लगातार यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने, दबाव बनाने और यहां तक कि जबरदस्ती नियंत्रण की बात कर रहे थे, जिससे नाटो और यूरोप में भारी तनाव पैदा हो गया था। ऐसे माहौल में रुट्टे ने ट्रंप को खुले मंच पर चुनौती देने के बजाय बंद कमरे में, उसकी ही भाषा में सुरक्षा, ताकत और रणनीतिक फायदे के फ्रेम में समझाया कि यह मुद्दा टकराव से नहीं बल्कि नाटो के साझा हितों से सुलझाया जा सकता है। इस बातचीत का नतीजा यह हुआ कि ट्रंप ने न सिर्फ टैरिफ की धमकी वापस ले ली, बल्कि यह भी कहा कि वह नाटो के साथ मिलकर ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर एक फ्रेमवर्क पर काम करेंगे। सबसे अहम बात यह रही कि रुट्टे ने ट्रंप को यह अहसास कराया कि इससे ट्रंप कमजोर नहीं बल्कि नेतृत्व दिखाने वाले नेता के तौर पर सामने आएंगे। ईएमएस/ 22 जनवरी, 2026