:: गलत बिलों को निरस्त करने और किसानों को 10 घंटे बिजली देने की मांग; मालिकाना हक का मुद्दा भी गरमाया :: इन्दौर (ईएमएस)। बिजली के निजीकरण, स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता और अघोषित बिजली कटौती के विरोध में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने संयुक्त रूप से मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने संभाग आयुक्त कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर कमिश्नर कार्यालय अधीक्षक श्री चौहान को ज्ञापन सौंपा। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि स्मार्ट मीटर लगाना उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए, इसे अनिवार्य न बनाया जाए। साथ ही बिजली बिलों में की गई बेतहाशा बढ़ोतरी को वापस लेने और गलत बिलों को तत्काल निरस्त करने की मांग भी उठाई गई। वामपंथी दलों ने खेती-किसानी के संकट पर चिंता जताते हुए सरकार से मांग की कि किसानों को सिंचाई के लिए कम से कम 10 घंटे से अधिक बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। प्रदर्शन के दौरान अवैध बेदखली और जमीन की लूट का मामला भी प्रमुखता से उठा। ज्ञापन में मांग की गई कि शासन की पूर्व घोषणा के अनुसार पात्र लोगों को मालिकाना हक दिया जाए। ज्ञापन का वाचन भाकपा के जिला सचिव रुद्रपाल यादव ने किया। उन्होंने कहा कि आम जनता बिजली के बढ़ते दामों और विभाग की मनमानी से त्रस्त है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया और सरकार विरोधी नारेबाजी की। :: आंदोलन तेज करने की चेतावनी :: माकपा के जिला सचिव अरुण चौहान ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार जनविरोधी नीतियां थोप रही है। उन्होंने आह्वान किया कि जब तक बिजली और जमीन से जुड़े इन बुनियादी सवालों का हल नहीं निकलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। इस आंदोलन में सोहनलाल शिंदे, एडवोकेट बीएल नागर, ओमप्रकाश खटके, भारत सिंह ठाकुर, सीएल सरावत, छगनलाल चौहान, कैलाश गोटानिया, भागीरथ कछवाह, भादरसिंह कटारे, रमेश झाला, किरण चौहान और ऋषभ वर्मा सहित मुन्नी बाई व गौराबाई जैसे कई कार्यकर्ता शामिल रहे। प्रकाश/23 जनवरी 2025