राज्य
24-Jan-2026
...


इन्दौर (ईएमएस) विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शासन से छात्रवृत्ति कर्मचारियों के जीपीएफ (जनरल फंड) हेतु प्राप्त करोड़ों रुपये की राशि में विभाग के रसूखदार अधिकारियों द्वारा 2 करोड़ 86 लाख रुपये के कथित भ्रष्टाचार की गाज निचले कर्मचारियों पर गिर रही है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की रिपोर्ट और विभागीय जांच के प्रमाणिक दस्तावेजों के अनुसार, यह घोटाला 2023-24 के वित्तीय वर्ष में छात्रवृत्ति फंड के गबन से जुड़ा है, जहां जीपीएफ खातों में हेराफेरी कर फर्जी भुगतान किए गए। कौमी एकता सद्भावना प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव सैयद यूसुफ अली ने विकास खंड कार्यालय में हुए इस भ्रष्टाचार पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि उक्त भ्रष्टाचार में लिप्त रसूखदार अधिकारियों को बचाते हुए लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को निशाना बनाकर पद से निष्कासित कर दिया गया है। यह घटना अपने आप में हास्यपूर्ण प्रतीत हो रही है। इतना बड़ा भ्रष्टाचार बिना बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के छोटे-कनिष्ठ अधिकारी कैसे कर सकते हैं ? यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि विभाग के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भ्रष्टाचार में लिप्त मुख्य अधिकारियों में जिला शिक्षा विकासखंड अधिकारी शांता स्वामी एवं प्राचार्य अनीता दुबे सहित अन्य प्राचार्यों की भूमिका स्पष्ट नजर आ रही है। MPPSC जांच रिपोर्ट में इन अधिकारियों के नाम फर्जी बिलों और जीपीएफ ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड्स से जुड़े पाए गए हैं, जो विभागीय ऑडिट में सामने आए हैं। सैय्यद युसूफ ने कहा कि इस पूरे विषय में नियुक्त जांच एजेंसी पर भी संदेह गहरा रहा है। शिक्षा विभाग में हुए इस करोड़ों रुपये के गबन और भ्रष्टाचार को लेकर जल्द ही एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर शिवम वर्मा से मिलेगा। प्रतिनिधि मंडल उनसे मांग करेगा कि इस पूरे विषय की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि यदि रसूखदार अधिकारियों को संरक्षण दिया जाता रहा, तो यह शिक्षा व्यवस्था की जड़ें खोखली कर देगा।