शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उठे विवाद में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और केशव मौर्या के अलग अलग सुर वाले बयानों से भाजपा सरकार को असहज कर दिया है। विरोधी इसके अलग अर्थ निकाल रहे हैं लेकिन लगता है कि पहली बार दोनों नेता किसी मुद्दे पर खुलकर एक-दूसरे के सामने आ गए हैं। गुरुवार को दिए गए इन बयानों के बाद यूपी भाजपा फिर से दो गुटों में बंटती नजर आ रही है। इस विवाद की वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असमंजस है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। आजमगढ़ पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने अपरोक्ष रूप से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनसे प्रार्थना है कि वह स्नान कर इस विषय का समापन करें। केशव मौर्या के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में देखा जा रहा है। इससे लगता है कि वे शंकराचार्य की स्थिति को मान्यता दे रहे हैं और विवाद को शांत करने की अपील कर रहे हैं। आपको बता दें यूपी के प्रयागराज में मौनी अमावस्या को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शाही सवारी के साथ स्नान करने निकले थे। प्रशासन ने उनके काफिले को रोक लिया था और अन्य अखाड़ों की तरह स्नान करने की सलाह दी थी। इसके बाद से विवाद भड़क गया। बात इतनी बढ़ी कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती धरने पर बैठ गए और प्रशासन ने भी नोटिस थमा दिया। सरकारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के हवाले से उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया गया। इस विवाद ने तूल पकड़ा तो यूपी में समाजवादी पार्टी भी एक्टिव हो गई और उसे सनातन का अपमान बताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कड़े शब्द कहते सुनाई दे रहे हैं।सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि यही योगी, जिसे आप लोग साधु-संत कहते हो, लेकिन हम उसे हुमायूं का बेटा अकबर कहते हैं और औरंगजेब कहते हैं। वे आगे कहते हैं कि योगी हिंदू कहलाने के लायक नहीं हैं। उनका आरोप है कि योगी सरकार में कई मंदिर तोड़े गए हैं, लेकिन योगी ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी का डर है। अविमुक्तेश्वरानंद के इन बेहद आपत्तिजनक बयान पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने बहुत सधे शब्दों में पलटवार किया उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि एक योगी, संत और संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता है। यही उसके जीवन का ध्येय होना चाहिए। उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं हो सकती है। धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान है। अगर अगर राष्ट्र की स्वाभिमान को चुनौती देता है तो हमें खुलकर उसके सामने खड़ा होना चाहिए। कोई धर्म के खिलाफ आचरण करता है, क्योंकि ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे। हमें उनसे सावधान रहना होगा, हमें सतर्क होना होगा। हालांकि योगी ने किसी का नाम लिए बिना कालनेमियो का जिक्र किया लेकिन इस से अविमुक्तेश्वरानंद विवाद और भड़क उठा।शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और यूपी सरकार के बीच विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। मौनी अमावस्या के दौरान स्नान को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यागराज माघ मेले में ही धरने पर बैठे हैं और प्रशासन से उनकी लड़ाई जारी है।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर पर प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया, 48 घंटे में जवाब मांगा, और कहा कि उनके कृत्यों से व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई। योगी सरकार ने उन्हें ‘शंकराचार्य’ मानने से इनकार किया और सुविधाएं रद्द करने की धमकी दी। अविमुक्तेश्वरानंद समर्थक कुछ संतों ने योगी पर ‘संत अपमान’ का आरोप लगाया। केशव का प्रणाम इसी विवाद में आया, जो सत्ता के गलियारों में भीतरी द्वन्द्व का हवाला देता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ को सनातन के लिए औरंगजेब से बुरा बताते हुए आलोचना की थी। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संत के लिए धर्म से बढ़कर कुछ नहीं हैं। सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि होते हैं। उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी भी कुछ नहीं होती। धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी होती है। राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। कई कालनेमि धर्म की आड़ लेकर सनातन को कमजोर कर रहे हैं। धर्म के खिलाफ आचरण करने वाला सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं हो सकता है। हरियाणा के सोनीपत में योगी आदित्यनाथ के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद पर जवाबी हमला माना जा रहा है। सीएम योगी ने कहा कि धर्म केवल वेश या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सनातन को कमजोर करने वालों कालनेमि बता दिया। बता दें कि रामायण में कालनेमि नाम का एक मायावी राक्षस का जिक्र है, जिसने संजीवनी बूटी लाने गए हनुमान जी को संत बनकर भरमाने की कोशिश की थी। बाद में हनुमान जी उसके छल को पहचान लिया और फिर उसे मार डाला। उधर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और आदित्यनाथ योगी के बीच वाक युद्ध चल रहा था इसी बीच यूपी सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या के बयानों ने असमंजस की स्थिति पैदा करने मे कोई कसर नहीं छोड़ी है आजमगढ़ पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अपरोक्ष समर्थन कर दिया । उन्होंने कहा कि मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनसे प्रार्थना है कि वह स्नान कर इस विषय का समापन करें। केशव मौर्या के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में देखा जा रहा है। इससे लगता है कि वे शंकराचार्य की स्थिति को मान्यता दे रहे हैं और विवाद को शांत करने की अपील कर रहे हैं। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और केशव मौर्य के बयानों से पार्टी में भी भ्रम की स्थिति बन गई है कि इस मुद्दे से कैसे निपटा जाए. यह बात सभी जानते हैं कि दोनों अलग-अलग खेमों से आते हैं, लेकिन यह पहली बार है जब किसी मुद्दे पर उनका खुला टकराव सामने आया है. राज्य में भाजपा सरकार की भीतरी गुटबाजी सतह पर आ गयी है। उधर विवाद को तूल देने में लगे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दल इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। धुर विरोधी योगी सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि संतों का अपमान हो रहा है। वहीं, भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। कुछ लोग शंकराचार्य को फर्जी कह रहे हैं, तो कुछ उनका समर्थन कर रहे हैं।मौर्य से समर्थन मिलने के बावजूद कई संतों और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने योगी आदित्यनाथ का समर्थन किया है. उनका कहना है कि माघ मेले में शाही स्नान नहीं होता, इसलिए अविमुक्तेश्वरानंद को इस पर ज़ोर नहीं देना चाहिए था. संत समाज में भी बंटवारा दिख रहा है। योगी के समर्थक जैसे बाबा रामदेव ने उनकी भाषा की आलोचना की है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कई मौकों पर बीजेपी के फैसलों की आलोचना की थी, जिसमें अयोध्या में “अधूरे” राम मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह, कुंभ मेले का कुप्रबंधन और कोविड-19 महामारी के दौरान गंगा में तैरती लाशों का मुद्दा शामिल है। देखना है कि इस विवाद का पटाक्षेप किस तरह होता है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 25 जनवरी /2026