- 277 लीटर शराब, सांसद का स्टीकर और भाई साहब की सवारी ने बढ़ाया सियासी नशा गाजीपुर (ईएमएस)। बिहार में शराबबंदी कानून के बावजूद 277 लीटर शराब के साथ पकड़ी गई काली स्कार्पियो एसयूवी ने राजनीति में ऐसा नशा घोल दिया है कि मामला सड़क से संसद तक चर्चा का विषय बन गया है। यह गाड़ी राज्यसभा सदस्य डॉ. संगीता बलवंत और उनके पति डॉ. अवधेश कुमार से जुड़ी बताई जा रही है। अब सवाल यह नहीं है कि शराब कहां से आई, बल्कि यह है कि “नेताजी के नाम की गाड़ी शराबबंदी वाले राज्य में क्या कर रही थी?” पुलिस ने जब इस स्कार्पियो को पकड़ा, तो उसमें भारी मात्रा में शराब बरामद हुई। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों ने सियासी आग में घी डाल दिया। वीडियो में उत्तराखंड में यही स्कार्पियो चलती दिख रही है, जिस पर राज्यसभा सदस्य का स्टीकर और भाजपा का झंडा लगा हुआ है। गाड़ी चला रहा व्यक्ति सांसद का भाई बताया जा रहा है। अब विपक्ष पूछ रहा है कि “अगर गाड़ी आपकी नहीं थी, तो उस पर नाम, झंडा और रिश्तेदार क्यों सवार था?” मामले को और संवेदनशील बना दिया एक वायरल तस्वीर ने, जिसमें संगीता बलवंत अपने भाई को राखी बांधती नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि “राखी के धागे से बंधा रिश्ता, स्कार्पियो से बंधी सियासत और शराब से भरी हकीकत!” शराब बरामदगी के बाद राज्यसभा सदस्य और उनके पति ने कोतवाली पुलिस में तहरीर देकर गाड़ी के मालिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि गाड़ी का गलत इस्तेमाल किया गया और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। डॉ. संगीता बलवंत ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि उनका परिवार किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल नहीं है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि अगर गाड़ी उनके नियंत्रण में नहीं थी, तो उस पर सांसद का स्टीकर और पार्टी का झंडा क्यों लगा था? विपक्ष का तंज: शराबबंदी सिर्फ जनता के लिए? इस मामले ने विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे दिया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि शराबबंदी का कानून आम लोगों पर सख्ती से लागू होता है, लेकिन “सत्ताधारी दल से जुड़े नाम आते ही कहानी बदल जाती है।” विपक्ष ने पूछा कि “क्या शराबबंदी में वीआईपी छूट भी शामिल है?” भाजपा की चुप्पी फिलहाल भाजपा की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। पार्टी की चुप्पी को लेकर भी तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। समर्थक इसे जांच पूरी होने तक संयम बता रहे हैं, तो विरोधी इसे असहज चुप्पी करार दे रहे हैं। जांच जारी, सियासत जारी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा इससे कहीं आगे निकल चुकी है। आज सवाल सिर्फ 277 लीटर शराब का नहीं, बल्कि सत्ता, स्टीकर और सिस्टम के रिश्ते का है।