क्षेत्रीय
25-Jan-2026
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- लापरवाही पर उठे सवाल महासमुंद(ईएमएस)। ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली महिला सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (मितानिनों) के लिए बनाए गए मितानिन शेल्टर का लाभ महासमुंद में अब तक नहीं मिल पाया है। निर्माण एजेंसी की लापरवाही, गुणवत्ताविहीन निर्माण और कार्य अवधि समाप्त होने के करीब दो साल बाद भी भवन का हैंडओवर नहीं होने से मितानिनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला अस्पताल परिसर में लगभग 10 लाख रुपये की लागत से मितानिन शेल्टर भवन का निर्माण वर्ष 2023-24 में किया गया था। निर्माण एजेंसी के रूप में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मई 2024 में भवन का निर्माण लगभग पूर्ण हो गया, लेकिन अब तक इसे अस्पताल प्रबंधन को औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं किया गया है। हैरानी की बात यह है कि बिना हैंडओवर के ही इस भवन का उपयोग स्टोर रूम के रूप में किया जा रहा है। इस दौरान भवन की टाइल्स तक क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूरदराज गांवों से मरीजों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचने वाली मितानिनों का कहना है कि भवन बने एक से दो साल बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें ठहरने और आराम की कोई सुविधा नहीं मिल सकी। मरीजों के साथ आने पर रुकने, बैठने और सोने तक में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मितानिन सम्मेलन के दौरान इस पूरे मामले की शिकायत मितानिनों ने महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा से की। विधायक के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में शेल्टर को मितानिनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई। विधायक ने बताया कि भवन में दरवाजे, नल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है, वहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन इसे स्टोर रूम के तौर पर इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने तत्काल भवन खाली कराने के निर्देश दिए हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बसंत माहेश्वरी ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन को अब तक भवन का हैंडओवर नहीं मिला है। निरीक्षण के दौरान नल और वॉश बेसिन जैसी कमियां पाई गई थीं, जिन्हें पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। सभी कार्य पूर्ण होने के बाद ही भवन को हैंडओवर लिया जाएगा। वहीं, सीजीएमएससी के उप अभियंता लेखराज ठाकुर का दावा है कि शेष कमियों को एक सप्ताह के भीतर दूर कर भवन का हैंडओवर कर दिया जाएगा। बड़ा सवाल यह है कि जब भवन लगभग दो साल से तैयार है, तो उसका हैंडओवर क्यों नहीं हुआ और बिना अनुमति इसे स्टोर रूम में कैसे तब्दील कर दिया गया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसी पर कोई कार्रवाई होगी या मामला फिर फाइलों में दबकर रह जाएगा। सत्यप्रकाश(ईएमएस)25 जनवरी 2026