धनबाद(ईएमएस)यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर मंगलवार को देशभर में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की गई। पांच दिवसीय कार्यप्रणाली (5-डे वर्किंग) की मांग को लेकर की गई इस हड़ताल के कारण एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, कैनरा बैंक और इंडियन बैंक समेत सभी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक शाखाएं बंद रहीं। तीन दिन के अवकाश के बाद लगातार चौथे दिन बैंक बंद रहने से नकदी प्रवाह पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।बैंक कर्मचारी लंबे समय से सप्ताह में केवल पांच दिन काम और शनिवार-रविवार की साप्ताहिक छुट्टी की मांग कर रहे हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत बैंक कर्मियों को रविवार के साथ महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को ही अवकाश मिलता है। बैंक यूनियनों का कहना है कि वर्ष 2024 में सरकार और यूनियनों के बीच 5-डे वर्किंग को लेकर सहमति बन चुकी थी, लेकिन अब तक इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। इसी देरी के विरोध में यूनियनों ने आंदोलन तेज करते हुए देशव्यापी हड़ताल का रास्ता अपनाया है। हड़ताल के बावजूद डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम सामान्य रूप से चालू रहीं, जबकि निजी क्षेत्र के बैंक खुले रहे।हड़ताल के दौरान बैंक कर्मियों ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग से कार्य-जीवन संतुलन बेहतर होगा। एक महिला बैंककर्मी ने बताया कि लगातार काम के दबाव के कारण परिवार और स्वास्थ्य के लिए समय नहीं मिल पाता। वहीं एसबीआई के जोनल सेक्रेटरी रंजीत कुमार जायसवाल ने कहा कि कर्मचारी दिन में 40 मिनट अतिरिक्त काम देने को भी तैयार हैं, लेकिन इसके बदले सप्ताह में दो दिन की छुट्टी जरूरी है। उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं के चलते 5-डे वर्किंग की मांग पूरी तरह जायज है। कर्मवीर सिंह/27जनवरी/26