लेख
28-Jan-2026
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पुस्तक सफ़र जो रुकता नहीं, संजय गोस्वामी द्वारा कृत पुस्तक आपको खुद ही अपने मेहनत के दम पर आपमें आशा की किरण जगा देगी विपरीत स्थिति में सफलता की ओर लेकर जाएगी यह सिर्फ़ परीक्षाओं या रैंक की कहानी नहीं है। यह एक ऐसी यात्रा की कहानी है जो एक रेलवे स्टेशन की सीढ़ियों से शुरू होती है और ज़िम्मेदारी के बोझ तले परिपक्व होती है।किसी लक्ष्य को प्राप्त न कर पाना है, लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि सफलता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है जो हमें अनुभव, सीख और सुधार का अवसर देती हैसफलता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है जो हमें अनुभव, सीख और सुधार का अवसर देती है, जिससे हम अपनी कमजोरियाँ पहचानकर, नए रास्ते तलाशकर, और दृढ़ता से प्रयास करके मजबूत बनते हैं और अंततः सफल होते हैं; असफलता से घबराकर रुकना नहीं, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है। सफ़र जो रुकता नहीं, एक ऐसे ही एक विज्ञानी सोच के संचारी की कहानी है जो आज ज्ञान के बल पर सफलता पाई है किसी के मेरिट को रोका जा नहीं सकता भले ही आपको इसमें असफलता हाथ लगे लेकिन सफलता सिर्फ पत्रिका में विज्ञान लेखों के छपने से नहीं होता आपको इसे विद्यालय में छात्रों को बाँटना होगा कोचिंग में अपना हुनर दिखा सकते है आज नॉलेज मायने रखती है नाम नहीं, नाम खुद ही लोगों में ज्ञान को संचार करने से होगा जिसके लिए वैज्ञानिक तथ्य की आवश्यकता हो यदि भगवान राम ईश्वर हैँ तो वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत करना होगा किसी के आगे हाथ नहीं ज्ञान फैलाओ इसके लिए लगन और मेहनत की जरुरत होगी अपने काम में ही इतना व्यस्थ रहें कि कौन क्या कर रहा है उसपर ध्यान देने की जरुरत नहीं है आपको सिर्फ मेहनत और ज्ञान का प्रकाश करना है गरीबों को मदद करना अपने सेहत पर ध्यान देना और भगवान राम को ध्यान करना है जिससे काम करने में शांति और त्याग की भावना आएगी जो सफलता की ओर अग्रसर करेगी पुस्तक में सफर रुकता नहीं है क्योंकि रुक गए तो गाड़ी प्लेटफॉर्म तक कैसे जाएगी इसलिए गाड़ी को ऐसा चलाना होगा कि क़ोई रास्ते में रुकावट आयी भी तो यदि नकारात्मक है तो कुचल दीजिये नहीं तो लोग मज़बूरी का फायदा उठा लेंगे दोस्ती, अकेलापन, दबाव और नाज़ुक सपने हर मोड़ पर उसके साथ चलते हैं। यह उपन्यास रातों की नींद, अटूट उम्मीदों और उन शांत पलों की बात करता है जब सबसे बड़े सवाल अंदर ही पूछे जाते हैं। जिस किसी ने भी किसी सपने के लिए अकेले चलने की हिम्मत की है, उसे यह कहानी बेचैन करने वाली जानी-पहचानी लगेगी।यह पुस्तक ऑनलाइन में अमेज़न पर उपलब्ध है एक गाना याद आता है जीवन के सफर में राही मिलते हैं बिछड़ जाने को और दे जाते हैं यादें तनहाई में तड़पने को ये रूप की दौलत वाले कब सुनते हैं दिल के नाले।यह गाना - फिल्म - मुनीमजी (1955) अभिनेता - देव आनंद, नलिनी जयवंत गायक - किशोर कुमार संगीत - एस. डी. बर्मन जीवन के सफर में राही को पैसा के लिए नहीं अपने इंसान के रूप में कार्य करना चाहिए अच्छा था राजनीति के कारण लेख नहीं छपा तो आप जीवन में निराश ना हों क्योंकि आपका सबसे बहमूल्य धन भगवान राम है और वही गिरने के बाद उठने की हिम्मत देगा.कभी गिरने से डरना मत, क्योंकि हर गिरावट हमें और मज़बूत बनाती है। गलतियाँ सब करते हैं, लेकिन उनसे सीखना ही असली जीत है। याद रखिए, जो आज ठोकर खाता है, वही कल सबसे ऊँचा उठता है।जब राम और रावण का युद्ध चल रहा था तो राम के हर तीर से बच जाता था जो भोलनाथ की रावण पर कृपा थी लेकिन भगवान अन्याय से लड़ने में बिलकुल नहीं घबराये बल्कि भगवान राम ने रावण को मारे थे 31 तीर, लेकिन ये 1 बाण बना मृत्यु का कारण बना। .../ 28 जनवरी /2026