-डॉक्टर्स ने दी चेतावनी— थोड़ी सी लापरवाही भी सेहत और जिंदगी दोनों के लिए खतरा नई दिल्ली,(ईएमएस)। मोटापा आज दुनिया भर में एक गंभीर समस्या बन चुका है। तेजी से वजन घटाने की चाह में लोग ओजेम्पिक, वेगोवी, मौनजारो जैसी जीएलपी-1 वेट लॉस दवाओं की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। ये इंजेक्शन हफ्ते में एक बार लगाए जाते हैं और भूख कम कर, ब्लड शुगर कंट्रोल करते हुए 10 से 15 फीसदी तक वजन घटा सकते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि इन दवाओं से वजन तो घट रहा है, लेकिन इसके साथ शरीर के जरूरी मसल्स भी तेजी से खत्म हो रहे हैं, जो आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया (यूवीए) की रिसर्च के मुताबिक, जीएलपी-1 दवाओं से जो वजन कम होता है, उसका करीब 25 से 40 प्रतिशत हिस्सा फैट नहीं बल्कि फैट-फ्री मास यानी मसल्स, हड्डियां और लीन टिश्यू होते हैं। यह बेहद चिंताजनक है, क्योंकि सामान्य तौर पर उम्र बढ़ने के साथ 10 साल में सिर्फ 8 प्रतिशत मसल्स ही कम होते हैं। इतनी तेजी से मसल्स लॉस होने से कमजोरी, मेटाबॉलिज्म गड़बड़ाने और बुजुर्गावस्था में गिरने जैसे खतरे बढ़ जाते हैं। रिसर्च टीम के प्रमुख एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. झेनकी लियू के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है, कि कई मरीजों ने दवाएं लेने के दौरान मसल्स कमजोर होने की शिकायत की है। खासतौर पर रीढ़ और शरीर को संतुलन देने वाले मसल्स कमजोर पड़ने से चलने-फिरने और खड़े रहने में दिक्कत आ सकती है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय चिकित्सकों का कहना है कि “जीएलपी-1 दवाओं से फैट के साथ-साथ मसल्स भी घट सकते हैं। अगर मरीज सही मात्रा में प्रोटीन नहीं लेते और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग नहीं करते, तो मसल्स लॉस का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। दरअसल सिर्फ कैलोरी कम करने से शरीर ऊर्जा के लिए मसल्स तोड़ने लगता है। मसल्स मेटाबॉलिक रूप से बेहद सक्रिय होते हैं और लंबे समय तक सेहत के लिए जरूरी हैं। इसलिए उनका नुकसान शरीर को अंदर से कमजोर कर देता है। डॉक्टर्स का कहना है कि इन दवाओं के साथ पर्याप्त प्रोटीन डाइट, रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (वेट लिफ्टिंग या बॉडी वेट एक्सरसाइज) और नियमित एक्सरसाइज बेहद जरूरी है। केवल वॉकिंग या कार्डियो करने से मसल्स सुरक्षित नहीं रहते। दवा बंद तो तेजी से बढ़ा वजन एक और बड़ा खतरा दवा बंद करने के बाद तेजी से वजन बढ़ने का है। मसल्स कम होने से शरीर का बेसल मेटाबॉलिक रेट घट जाता है, जिससे वजन दोबारा और ज्यादा फैट के रूप में बढ़ने लगता है। इसे ‘यो-यो इफेक्ट’ कहा जाता है। ऐसे में अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन ने सलाह दी है कि जीएलपी-1 दवाएं शुरू करने से पहले मरीज की मसल्स और पोषण स्थिति की जांच अवश्य रुप से कर लेनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही डाइट और एक्सरसाइज के बिना ये दवाएं वजन घटाने के बजाय भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर सकती हैं। हिदायत/ईएमएस 27जनवरी26