- 1986 में शुरु हुई एक्सरसाइज में 4 लाख जवान, 4000 टैंक, 300 फाइटर एयरक्राफ्ट थे शामिल नई दिल्ली,(ईएमएस)। पाकिस्तान को एक भी मौका ऐसा नहीं मिला, जब युद्ध की उसकी साजिश अंजाम तक पहुंच पाई हो। 40 साल पुरानी एक ऐसी ही कहानी है, जो शायद अभी तक आपने सुनी न हो। दरअसल यह कहानी भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स’ से जुड़ी है, जिसकी भनक लगने के बाद पाकिस्तान की हालत ऐसी हो गई थी कि वह डर के मारे कांपने लगा था। ब्रासस्टैक्स भारतीय सेना का ऐसा ऑपरेशन था, जिसे आज तक साइकोलॉजिकल वॉर का मास्टर माना जाता है। बता दें 1947 में मिली आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सही मायने में तीन नहीं चार युद्ध हो चुके हैं। पहला 1948 में, दूसरा 1965 में, तीसरा 1971 में और चौथा 1984 में सियाचिन ग्लेशियर का। 1971 की जंग में पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा बांग्लादेश बन गया, जिससे इस्लामाबाद की फौज बदले की आग में जल रही थी। उसके बाद जम्मू और कश्मीर की लाइन ऑफ कंट्रोल पर छिटपुट गोलीबारी आम हो गई थी और पाकिस्तान अपनी आईएसआई के जरिए कश्मीर में विद्रोह भड़काने की तैयारी कर रहा था। ऐसे में भारतीय थलसेना ने ‘ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स’ की योजना बनाई। यह नाम आया ब्रिटिश जनरल सर फिलिप चेस्टर वॉट से, जिन्होंने 1920 में अफगानिस्तान में ‘ब्रास्टैक्स’ का इस्तेमाल तोपखाने के लिए किया था। ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स एक मिलिट्री एक्सरसाइज थी, जिसे जनवरी 1986 में राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तान में शुरू किया गया था। उस दौर में यह सबकॉन्टिनेंट की सबसे बड़ी मिलिट्री एक्सरसाइज थी। इस एक्सरसाइज में करीब 4 लाख जवान, 4000 टैंक, 300 फाइटर एयरक्राफ्ट, ब्रह्मोस जैसी प्रोटोटाइप मिसाइल और 400 आर्टिलरी रेजिमेंट्स शामिल हुईं थी। इस एक्सरसाइज में शामिल होने वाले फाइटर एयरक्राफ्ट में मिग-21 और सुखाई-7 शामिल थे। भारतीय सेना के तत्कालीन चीफ जनरल कृष्णा एस ब्रार के नेतृत्व में यह एक्सरसाइज 29 जनवरी से 4 फरवरी तक चला था, जिसका मकसद अपनी सैन्य मशीनरी की टेस्टिंग करना था। ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स के लिए समय गणतंत्र दिवस परेड के ठीक बाद का चुना गया। भारतीय एयर फोर्स ने ‘फोक ट्रॉट’ ऑपरेशन चलाया, जिसमें फाइटर जेट्स ने एलओसी के पास लो-लेवल फ्लाइंग की। नेवी ने भी अरब सागर में अपनी मूवमेंट शुरू कर दी। सब कुछ इतना बड़ा था कि अमेरिकी सैटेलाइट्स ने भी इसे कैप्चर कर लिया था। सिराज/ईएमएस 28 जनवरी 2026