राष्ट्रीय
28-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों का मानना है कि बालों के स्वास्थ्य के लिए उचित पोषण, नमी और रक्त संचार बेहद जरूरी है। सर्दियों में लोग ऊनी टोपी और मफलर पहनते हैं ताकि ठंड से बच सकें, लेकिन यह बालों के लिए एक गुप्त खतरा भी बन जाती है। लंबे समय तक ऊनी टोपी पहनने से बालों में रगड़ पैदा होती है, उलझन बढ़ती है और टूटने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसका असर इतना होता है कि बालों की लंबाई धीमी हो जाती है और वे कमजोर महसूस होने लगते हैं। सर्दियों में धूप का कम होना भी बालों की वृद्धि को प्रभावित करता है। विज्ञान के अनुसार, सूर्य की किरणों से मिलने वाला विटामिन-डी बालों के रोमों को सक्रिय करता है। सर्दियों में अक्सर धूप कम निकलती है और लोग घरों में बंद रहते हैं। इसके चलते विटामिन डी की कमी हो जाती है और बालों की जड़ों तक पोषण नहीं पहुंच पाता। नतीजा ये होता है कि बाल धीरे-धीरे बढ़ते हैं और झड़ने की समस्या बढ़ जाती है। आयुर्वेद में भी यह माना गया है कि सूर्य की हल्की धूप बालों की ऊर्जा और मजबूती के लिए जरूरी है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सर्दियों में थोड़ी देर भी सही, रोजाना धूप में बैठना बालों के लिए लाभकारी होता है। शुष्क हवा भी इस मौसम में बालों की वृद्धि में बाधा डालती है। सर्दियों में हवा में नमी बहुत कम होती है, जो बालों की प्राकृतिक नमी को छीन लेती है। इससे बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और टूटने की संभावना बढ़ जाती है। सिर की त्वचा भी शुष्क हो जाती है, जिससे पोषण की कमी होती है और बाल जल्दी नहीं बढ़ते। एक शोध में बताया गया है कि कम नमी वाली हवा बालों के स्ट्रक्चर को कमजोर करती है और उन्हें पतला बना देती है। सर्दियों में गर्म पानी से नहाना भी बालों के लिए खतरा बन जाता है। ठंड से बचने के लिए लोग लंबे समय तक गर्म पानी से नहाते हैं, लेकिन यह बालों के प्राकृतिक तेलों को हटाकर उनके क्यूटिकल्स को नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण बाल कमजोर हो जाते हैं, जल्दी टूटते हैं और पतले होते चले जाते हैं। सुदामा/ईएमएस 28 जनवरी 2026