लेख
28-Jan-2026
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इनदिनों युगों से चले आ रहे प्रयागराज माघ स्नान की सनातनी महिमा को दरकिनार कर एक धर्मगुरु की अहमन्यता ने बखेड़ा खड़ा कर दिया है इस तरह एक माह चलने वाले जिस सनातनी महापर्व से देश के कोने-कोने तक और समूचे विश्व में अध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया जाना चाहिए था वह सिर्फ एक धर्मगुरु की जिद से पैदा विवाद के चलते तमाम मीडिया को खुद पर केंद्रित कर संस्कृति और धर्म को ठेस पहुंचाने के धतकरम में फंस गया है। वास्तव में यह एक बड़ा प्रोपेगेंडा है जिसकी कमान विरोधी दलों के नीति नियंताओ के हाथों में है और हमारे कथित धर्मगुरु उनकी उंगलियों के ईशारे पर एक महान संस्कृति के गौरव पूर्ण सांस्कृतिक अध्यात्मिक पर्व में विध्न पहुंचाने की कुचेष् कर अपने अहम की तुष्टी कर रहे हैं। सवाल उठता है कि इन धर्मगुरु के लिए पालकी की सवारी अधिक महत्वपूर्ण है या माघ स्नान क्योकि इन्होंने सिर्फ अपनी पालकी से उतर कर पचास कदम पैदल चलना स्वीकार नहीं किया लेकिन माघ स्नान की परवी के स्नान को त्याग दिया स्पष्ट है कि इनके लिए सनातनी मान्यताओं से अधिक अपनी मिथ्या अहंकार और प्रतिष्ठा का प्रदर्शन अधिक प्रिय है। दरअसल यह वह व्यक्ति है जो पिछले एक लंबे समय से सनातन धर्मगुरु का चोला पहन कर सनातन को ही घोर अपमान और क्षति पहुचाने में व्यस्त हैं। ये कोई पहला मौका नहीं है जब तथाकथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सुर्खियों में बने हुए हैं। इससे पहले अपने विवादित बयानों को लेकर भी वो कई बार चर्चाओं में रहे हैं। आज हम आपको उनके तमाम बयानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें लेकर एक समय बवाल मचा था स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राहुल गांधी हिंदू नहीं हैं और इसलिए उन्हें राम मंदिर में प्रवेश नहीं करने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अपील करता हूं कि राहुल गांधी को राम मंदिर में प्रवेश न करने दें। जो व्यक्ति हिंदुओं को गाली देता है, वह वहां जाने के लायक नहीं है सिंधु जल रोकने के मामले में भी अविमुक्तेश्वरानंद ने अलग सुर अलापा। उन्होंने कहा पाकिस्तान के लिए। जब हमने भारत सरकार की जल रोकने की व्यवस्था के बारे में पता किया। तो पता चला कि सरकार के पास कोई व्यवस्था ही नहीं है। अगर सरकार इसको रोकने की तैयारी करें तो कम से कम 20 साल लगेगा और पैसा कितना लगेगा, उसकी कोई बात ही नहीं है। संधि को खत्म करके जनता को मूर्ख नहीं बना सकते। अप्रैल 2025 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वक्फ संशोधन बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि यह बिल मुस्लिमों के लिए एक ‘सौगात-ए-मोदी है। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक जुमला है क्योंकि आज तक न तो वक्फ संपत्ति सरकारी हुई है और न ही हिंदू समाज को इसका कोई लाभ हुआ है। उनका कहना था कि यह एक राजनीतिक शिगूफा मात्र है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भी विवादास्पद टिप्पणी की। उनका कहना था कि जो लोग अंग्रेजी तारीखों पर अपना जन्मदिन मनाते हैं, वे हिंदू नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के देवी-देवताओं की जन्म तिथियाँ अंग्रेजी कैलेंडर से नहीं होतीं, और ऐसे लोग भारतीय संस्कृति से विमुख होते हैं।। गौहत्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि हमे भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक ही सवाल पूछना है, तुम हिन्दू हो।।तुम्हारे पास ताकत है और तुम गद्दी पर बैठे हो। तुमने हिन्दुओं के वोट लिए हैं। तुम गाय के बछड़े को दुलारते हुए दिखाई भी दे रहे हो। बावजूद इसके क्या कारण है कि पीएम गौ हत्या को बंद नहीं करा रहे हैं। क्या दबाव है इसको सार्वजनिक करो। या फिर हिन्दू-हिन्दू वाला नाटक छोड़ो। जुलाई 2024, को अविमुक्तेश्वरानंद ने केदारनाथ मंदिर से 228 किलो सोना गायब होने का आरोप लगाया था। तब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् और निरंजनी अखाड़ा के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने इस मामले पर जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद के पास अगर सोना चोरी का सबूत है तो उन्हें पुलिस या कोर्ट को सौंपे। उन्होंने कहा था कि अगर उनके पास प्रमाण नहीं है तो सुर्खियों में बने रहने के लिए अनर्गल बयानबाजी न करें इतना ही नहीं काशी विश्वनाथ मंदिर गलियारे पर भी असहज राग अलापते हुए कहा कि उन्होंने काशी में मंदिर तोड़े, सिर्फ मंदिर ही नहीं दो-दो हजार साल, 1500 साल, हजार साल पुरानी मूर्तियों को तोड़कर जब उन्हें मलबे में फेंका तो हमसे नहीं देखा गया। हमने विरोध किया और आज भी करते हैं और जब तक जीवित रहेंगे तब तक करते रहेंगे। जुलाई, 2024 को शंकराचार्य ने कहा था,हम हिंदू धर्म को मानते हैं।हम पुण्य और पाप में विश्वास करते हैं।विश्वासघात को सबसे बड़ा पाप कहा जाता है, यही उद्धव ठाकरे के साथ हुआ है।उन्होंने मुझे बुलाया था।मैं यहां (मातोश्री) आया। उन्होंने स्वागत किया। हमने कहा कि उनके साथ हुए विश्वासघात से हमें दुख है। जब तक वे दोबारा सीएम नहीं बन जाते, हमारा दुख दूर नहीं होगा। रामभद्राचार्य पर निशाना साधते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आप कहते हो कि मैंने शास्त्र पढ़ लिए, लेकिन शास्त्रों में लिखा है कि जो भी विकलांग होता है उसको संन्यास का अधिकार नहीं है, उसके बाद भी आप दंड लेकर लोगों के सामने संन्यासी बने घूम रहे हो। शास्त्रों के विरोध में आप कैसे संन्यासी बनकर घूम रहे हो।आप तुलसी दास जी का विरोध करते हो, रामानंदाचार्य जी का विरोध करते हो। आदि शंकराचार्य और चारों पीठों के शंकराचार्य के खिलाफ टिप्पणी करते हो, आप उपनिषद के भी विरोधी हो इन दिनों अविमुक्तेश्वरानंद खुलेआम योगी आदित्यनाथ जी के लिए तू तड़ाक बोल रहे हैं, योगी को संत मानने से इंकार कर रहे हैं योगी के खिलाफ इतना एजेंडा सपा, कांग्रेस, बसपा और पूरा इंडी गठबंधन नहीं चला सका है, जितना एजेंडा ये तथाकथित शंकराचार्य चला रहे हैं। जब पालघर में साधुओं को मारा गया तो अविमुक्तेश्वरानंद चुप रहे और भाजपा की सरकार बनी तो कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उद्धव ठाकरे सीएम नहीं रहे। सीएए कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के मुस्लिमों को भी भारत की नागरिकता देने की मांग की। कुख्यात अतीक अहमद और अशरफ की मौत न्यायिक जांच की मांग की। बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की ताकि भाजपा राजग सरकार को हराया जा सके। मुर्शिदाबाद में हिंदुओं पर अत्याचार और पलायन पर शांतिप्रिय दंगाइयों को क्लीन चिट दी और इसे कानून व्यवस्था का मामला कहा सनातन धर्म को डेंगू,मलेरिया बताने वाले इंडी गठबंधन के नेताओं का समर्थन किया- महाकुंभ के दौरान कहा कि हमारा मुख्यमंत्री झूठा है और योगी आदित्यनाथ को इस्तीफ़ा देना चाहिए देश में चार शंकर पीठें हैं लेकिन सिर्फ ये तथाकथित शंकराचार्य ही लगातार सुर्खियों में क्यों रहते हैं ? माघमेला में पुरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद जी भी गए हैं लेकिन कहीं कोई बवाल नहीं हुआ सभी अखाड़ों, हजारों संतों ने स्नान किया लेकिन कहीं कोई बवाल नहीं हुआ। करोड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान किया लेकिन कहीं कोई बवाल नहीं हुआ जैसे ही अविमुक्तेश्वरानंद पहुंचे तो बवाल हो गया। अविमुक्तेश्वरानंद का ईगो देखिए वह मौनी अमावस्या के दिन रथ पर सवार होकर और अपने साथ भीड़ लेकर संगम नोज की तरफ निकल पड़े पुल नंबर दो बंद था लेकिन इन्होंने व इनके शिष्यों ने जबरन पुल नंबर दो खोल दिया और अविमुक्तेश्वरानंद अवैध रास्ते से रथ पर सवार होकर संगम नोज के पास 50 मीटर दूर तक पहुंच गए यहां प्रशासन ने इन्हें रोका और कहा कि महाराज जी, संगम नोज सिर्फ 1 मिनट की दूरी पर है, कृपया रथ से उतारकर पैदल ही संगम नोज तक चलें क्योंकि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ है रथ से चलेंगे तो समस्या हो सकती है करोड़ों श्रद्धालु कष्ट उठाकर माघ मेले में स्नान करने आए हैं लेकिन ये महाराज जी 50 मीटर पैदल नहीं चल सकते, फिर भले उन श्रद्धालुओं को असुविधा हो, भगदड़ हो और वो मर जाएं। एक व्यक्ति के नैरेटिव और ईगो के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ की जान के साथ नहीं खेला जा सकता। अविमुक्तेश्वरानंद जी एक ऐसा नेरेटिव खड़ा करने का प्रयत्न कर रहे हैं जो ब्राह्मण समाज को 2027 में भाजपा के खिलाफ खड़ा कर दे और योगी आदित्यनाथ की सत्ता से विदाई हो जाए। लेकिन उनकी अपनी प्रतिष्ठा ही धूमिल हो रही है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 28 जनवरी /2026