राज्य
29-Jan-2026


हाई कोर्ट ने आपराधिक प्रकरण किया निरस्त जबलपुर (ईएमएस) । म.प्र. उच्च न्यायचालय के न्यायाधीश हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने एक मामले में सुनवाई के बाद जारी अपने एक आदेश में स्पष्ट किया कि अधिवक्ता द्वारा फोटो खींचना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। लिहाजा, उसके विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरण निरस्त करने के योग्य है। रीवा निवासी अधिवक्ता सुभाष तिवारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता निखिल भट्ट ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध रीवा के सोहागी थाने में अपराध पंजीबद्ध हुआ था। उक्त प्रकरण को निरस्त करने की मांग के साथ उच्च न्यायालय की शरण ली गई है। शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि वह अपने दोस्तों के साथ बाजार में जूस पी रही थी। इसी दौरान अधिवक्ता ने उसकी फोटो खींच ली। यही नहीं बदनाम करने की धमकी दी। इस प्रकरण में आपत्ति का बिंदु यह है कि फोटो खींचने की घटना 31 मई, 2024 की बताई गई है और एफआइआर पांच महीने बाद 17 अक्टूबर को दर्ज कराई गई है। इसके अलावा शिकायतकर्ता महिला के दादा के प्रकरण में विपक्षी पक्ष के तरफ से याचिकाकर्ता पैरवी कर रहा है। लिहाजा आवेदक के विरुद्ध पेशेगत शत्रुता व व्यक्तिगत प्रतिशोध के कारण एफआइआर दर्ज करवाई गई। मामले में सुनवाई के बाद एकलपीठ ने अपने आदेश में साफ किया कि यदि आरोपित किसी महिला की इज्जत को ठेस पहुंचाने के इरादे से कोई शब्द बोले, कोई आवाज या इशारा करे या कोई चीज दिखाए, तब अपराध बनता है क्योंकि इस तरह सेे महिला की प्राइवेसी में दखल दिया जाता है। इस तरह के अपराध में तीन साल तक की जेल और जुर्माना का प्रविधान है। किंतु इस प्रकरण में ऐसा कुछ नहीं हुआ, इसलिए याचिकाकर्ता को राहत दी जाती है। ईएमएस/29जनवरी2026