क्षेत्रीय
30-Jan-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। देशभर के मेडिकल परिसरों में रैगिंग की बढ़ती घटनाओं के बीच छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने रैगिंग रोकथाम को लेकर अपनाए गए अपने सख्त, संवेदनशील और व्यावहारिक मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। नेशनल मेडिकल कमीशन (हृरूष्ट)/नेशनल मेडिकल काउंसलिंग द्वारा आयोजित एंटी-रैगिंग जागरूकता एवं संवेदनशीलता वेबिनार में देश के लगभग 600 मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सा संस्थानों ने भाग लिया, जहां सिम्स बिलासपुर के प्रयासों को उदाहरण के रूप में रखा गया। इस वेबिनार का उद्देश्य मेडिकल परिसरों में रैगिंग की घटनाओं पर प्रभावी रोकथाम, लागू कानूनों एवं नियमों की जानकारी साझा करना तथा छात्रों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना रहा। एनएमसी को लगातार प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के एमबीबीएस छात्रों से रैगिंग से जुड़ी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिनमें अधिकांश घटनाएं छात्रावासों और कैंपस से संबंधित हैं। इन मामलों में शारीरिक हिंसा, मौखिक दुव्र्यवहार, धमकी, जबरन वसूली और गंभीर मानसिक उत्पीडऩ जैसे आरोप सामने आए हैं। कुछ प्रकरणों में यह उत्पीडऩ छात्रों के लिए अत्यधिक मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसे दुखद परिणामों का कारण भी बना है। एनएमसी द्वारा लागू एंटी-रैगिंग रेगुलेशंस 2021, जो यूजीसी नियमों के अनुरूप हैं, में रैगिंग की स्पष्ट परिभाषा और दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। इनमें निलंबन, निष्कासन, प्रवेश निरस्तीकरण और आपराधिक कार्रवाई तक शामिल है। आयोग ने स्पष्ट किया कि कानून के प्रति अज्ञानता न तो छात्रों के लिए स्वीकार्य है और न ही संस्थानों के लिए। वेबिनार में सिम्स बिलासपुर द्वारा रैगिंग की रोकथाम के लिए किए गए ठोस और प्रभावी संस्थागत उपायों की विस्तृत जानकारी साझा की गई। सिम्स प्रशासन ने बताया कि संस्थान में शून्य सहनशीलता नीति के तहत निरंतर निगरानी और सख्त अनुशासनात्मक व्यवस्था लागू है। नवप्रवेशित छात्रों के लिए मेंटॉर-मेंट्री (रूद्गठ्ठह्लशह्म्-रूद्गठ्ठह्लद्गद्ग) कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिससे उन्हें प्रारंभिक चरण से ही फैकल्टी और वरिष्ठों का मार्गदर्शन एवं भावनात्मक सहयोग मिल सके। इसके साथ ही छात्रावासों और परिसरों में अचानक निरीक्षण (अचेत निरीक्षण) की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक हॉस्टल और हर फ्लोर पर फ्लोर मैनेजर, पृथक सुरक्षा गार्ड, अलग-अलग मोबाइल संपर्क नंबर और सीसीटीवी कैमरे सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। सिम्स में छात्रों से नियमित रूप से एंटी-रैगिंग प्रतिज्ञा दिलाई जाती है और रैगिंग विरोधी सेरेमनी आयोजित की जाती है। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान छात्र-छात्राओं एवं उनके अभिभावकों से शपथ पत्र लिया जाता है, जिससे सभी की सामूहिक जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सके। किसी भी प्रकार की शिकायत या सूचना के लिए संस्थान द्वारा हेल्पलाइन नंबर 9425502353 जारी किया गया है, जिस पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। इस राष्ट्रीय वेबिनार में सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति सहित डॉ. आरती पांडे, डॉ. समीर पैकरा, डॉ. संगीता रमन जोगी, डॉ. शिक्षा जांगड़े, डॉ. रेखा बरापतरे, डॉ. सागरिका प्रधान, डॉ. चंद्रहास ध्रुव, डॉ. राजकुमार मरकाम, डॉ. विनोद टंडन, डॉ. नागेंद्र साहू एवं डॉ. केशव कश्यप की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और अन्य स्टाफ सदस्य भी शामिल हुए। एनएमसी के एंटी-रैगिंग सेल द्वारा आयोजित इस वेबिनार में एक सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय टास्क फोर्स तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों पर भी प्रकाश डाला गया। इन सिफारिशों में रैगिंग की रोकथाम, समयबद्ध कार्रवाई, मूल कारणों की पहचान और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि, छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर में रैगिंग के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति को पूरी सख्ती और संवेदनशीलता के साथ लागू किया गया है। हमारा स्पष्ट विश्वास है कि भय-मुक्त, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण के बिना गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा संभव नहीं है। नवप्रवेशित छात्रों के मानसिक एवं भावनात्मक संरक्षण के लिए मेंटॉर-मेंट्री व्यवस्था, सतत निगरानी, त्वरित शिकायत निवारण और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। सिम्स प्रशासन प्रत्येक छात्र के साथ खड़ा है और रैगिंग जैसी किसी भी गतिविधि को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।