गुवाहाटी(ईएमएस)। संगीत जगत की मशहूर हस्ती जुबीन गर्ग की सितंबर 2025 में सिंगापुर में हुई रहस्यमयी मौत के मामले में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। शुक्रवार को गुवाहाटी सत्र न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तीन प्रमुख आरोपियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने मुख्य आरोपी संगीतकार अमृतप्रभा महंता और जुबीन गर्ग के दो व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। वहीं अपनी बेल याचिका में महंता के वकील ने कहा कि उन्होंने असम और उसके बाहर गर्ग के साथ परफॉर्म किया था और उनके कहने पर वह सिंगापुर में फेस्टिवल के लिए उनके साथ गई थीं। वह 29 साल की महंता के लिए पिता जैसे थे। इसमें कहा गया है कि पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि उन्हें गर्ग के साथ वही कमरा दिया गया है और वह विदेश में कमरे के इस अलॉटमेंट पर कोई आपत्ति नहीं कर सकती थीं और क्योंकि उन्हें अपने पिता जैसे व्यक्ति के साथ उसी कमरे में रहने के लिए कहा गया था, इसलिए वह उसी कमरे में रहीं। उन्हें पिछले दिन तक यॉट राइड के बारे में पता नहीं था। सत्र न्यायाधीश ने अमृतप्रभा महंता की याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं, जिनमें कानून के तहत मृत्युदंड या आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों से सहमति जताते हुए माना कि प्रथम दृष्टया ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं जो दर्शाते हैं कि महंता ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एक ऐसी आपराधिक साजिश रची, जिसके कारण अंततः जुबीन गर्ग की मृत्यु हुई। महंता उन चार मुख्य आरोपियों में शामिल हैं, जिन पर सिंगापुर में गर्ग की मौत के सिलसिले में हत्या का आरोप दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि जुबीन गर्ग सितंबर 2025 में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में प्रस्तुति देने के लिए सिंगापुर गए थे। उनके साथ इस मामले में उत्सव के आयोजक श्यामकानु महंता, मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और संगीतकार शेखर ज्योति गोस्वामी भी आरोपी हैं। सुनवाई के दौरान महंता के वकील ने दलील दी कि वह जुबीन को पिता समान मानती थीं और उनके साथ कई शो कर चुकी थीं। उन्होंने तर्क दिया कि होटल में कमरा आवंटन उनकी मर्जी से नहीं हुआ था और विदेश में अकेले होने के कारण वे वहां आपत्ति नहीं कर सकीं। हालांकि, पुलिस की चार्जशीट में उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि महंता ने सिंगापुर के होटल में जुबीन को अत्यधिक शराब पीने के लिए उकसाया और उनके गिरते स्वास्थ्य के बारे में परिजनों या मैनेजर को सूचित नहीं किया। साथ ही, उन पर गंभीर नशे की हालत में जुबीन को बिना लाइफ जैकेट के समुद्र में उतरने के लिए प्रोत्साहित करने का भी आरोप है। दूसरी ओर, जुबीन के दो पीएसओ—नंदेश्वर बोराह और परेश बैश्य—पर आपराधिक साजिश के साथ-साथ विश्वासघात और जुबीन के पैसों के गबन का आरोप है। कोर्ट ने इसे समाज पर बुरा प्रभाव डालने वाला गंभीर अपराध करार दिया। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा है क्योंकि सिंगापुर और भारत की जांच रिपोर्टों में विरोधाभास है। जहां सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट और वहां की पुलिस इसे अत्यधिक नशे के कारण पानी में डूबने से हुई एक दुर्घटना मान रही है, वहीं भारत में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इसे हत्या और सुनियोजित साजिश करार दिया है। एसआईटी ने इस मामले में 2,500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। जुबीन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने इस मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपियों की जमानत का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस संवेदनशील मामले की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालत के गठन की मांग की है। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी 2026 की तिथि निर्धारित की है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/31जनवरी2026