राज्य
01-Feb-2026


- प्रदर्शन के आधार पर ही नितिन नबीन के कार्यकाल के दौरान दिया जाएगा व्यापक संगठनात्मक संरचना में स्थान भोपाल (ईएमएस)। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन इन दिनों चर्चा में छाए हुए हैं। चर्चा है अध्यक्ष बनने के बाद से वह अपनी नई टीम बनाने पर कार्य कर रहे हैं। खबर आ रही है कि अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में शामिल होने वाले नेताओं को अग्नि परीक्षा यानी ऑडिशन देना होगा। इसमें पास होने के बाद ही उनकी टीम का हिस्सा बना जा सकता है। अब सवाल उठता है कि यह किस तरह का ऑडिशन होगा, तो इस पर सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए देश भर से चुने जा रहे भाजपा नेताओं को उनके प्रदर्शन के आधार पर नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में शामिल किया जाएगा। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, टीम नबीन में शामिल होने वाले नेताओं की अब तक की पूरी राजनीतिक कुंडली का आकलन किया जाएगा। विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव चुनावों के दौरान किस नेता की परफॉर्मेंस कैसी रही इसको भी देखा जाएगा। उसके बाद नेताओं की सूची बनाई जाएगी। फिर उसका संघ, संगठन और सरकार के स्तर पर मंथन किया जाएगा। उस मंथन में एक-एक नाम पर विचार-विमर्श करने के बाद नाम अलग किए जाएंगे। एक सूत्र ने बताया कि उनके प्रदर्शन के आधार पर ही नितिन नबीन के कार्यकाल के दौरान उन्हें व्यापक संगठनात्मक संरचना में स्थान दिया जाएगा। भाजपा के एक नेता ने कहा, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ये नेता चुनाव तैयारियों की निगरानी में अधिक से अधिक समय बिताएंगे और टिकट वितरण से संबंधित निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना है। एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि इसका मतलब है कि यह भी है कि नितिन नबीन की नई टीम और उससे जुड़े संगठनात्मक परिवर्तनों में अभी कुछ समय लगेगा। कहा जा रहा कि 45 वर्षीय नितिन नबीन की टीम में नए चेहरों और अनुभवी नेताओं का मिश्रण रहने की उम्मीद है। पांच राज्यों के चुनाव बनेंगे आधार पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के एक नेता का कहना है की भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम बनाने के लिए इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को भी आधार बनाया जाएगा। इस साल असम, तमिलनाडु , केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव हैं। एक भाजपा नेता ने कहा कि नितिन नबीन की टीम युवा और अनुभवी नेताओं को लेकर बनाई जाएगी जो भाजपा, संघ और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच पुल का काम करेगी। भाजपा की नई टीम में 55 से कम के नेता भाजपा 2029 और उससे आगे की राजनीति के हिसाब से भी अपनी गोटियां सेट करना चाहेगी। मतलब,जब भी हो इनमें ज्यादा से ज्यादा युवा चेहरों को जगह मिलना तय है और इसी तरह का बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में भी देखने को मिल सकता है। नितिन नबीन की नई टीम में पार्टी के ज्यादातर पदाधिकारियों की उम्र 55 वर्ष से कम हो सकती है। मतलब, जिस तरह से पार्टी ने अचानक एक युवा चेहरे को पार्टी की कमान सौंपी है, उसी हिसाब से उनकी नई टीम में युवा नेताओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़े रोल में देखा जा सकता है। यह वो टीम हो सकती है, जिसे लेकर पार्टी 2029 और उसके आगे के चुनावों में उतरना चाहेगी। ये युवा चेहरे पार्टी को जहां नया जुझारू तेवर देने में मदद कर सकते हैं, वहीं इनके माध्यम से दूरगामी राजनीतिक संदेश देने की भी कोशिश रहेगी। नई टीम में सभी तरह का समीकरण होगा नीतीन नबीन की नई टीम में ज्यादातर ऐसे नेताओं को प्राथमिकता मिल सकती है, जो भाजपा और आरएसएस की विचारधारा में तप कर उभरे हों। वहीं पार्टी कुछ ऐसे नेताओं पर भी दांव लगा सकती है, जो सामाजिक और राजनीतिक तौर पर पार्टी के संगठन को नई धार दे सकें। रिपोर्ट में कहा गया है कि संगठन के मौजूदा प्रदेश नेताओं में से भी कुछ लोग नई टीम के हिस्सा हो सकते हैं, वहीं कुछ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व सीएम और कुछ पूर्व केंद्रीय मंत्री भी इसका हिस्सा बन सकते हैं। पार्टी के बाद सरकार में बदलाव के आसार हालांकि, यह बात प्रधानमंत्री मोदी को छोडक़र कोई नहीं जानता कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल कब होगा। लेकिन, सच्चाई ये है कि मोदी सरकार में अभी जितने मंत्री हैं, उनमें 34 मंत्री 2021 से ही बने हुए हैं। इनमें से 19 तो कैबिनेट मंत्री हैं। रिपोर्ट के अनुसार मोदी 3.0 के भी कुछ महीनों में दो साल होने को हैं। ऐसे में मंत्रियों की परफॉर्मेंस और उनके कार्यों में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। मतलब, सरकार में अगर कुछ नए युवा चेहरों को लाया जाता है तो कुछ चेहरे संगठन में भी शिफ्ट हो सकते हैं। ऐसे में पार्टी संगठन में बदलाव के बाद ही मंत्रिपरिषद में बदलाव का आधार तैयार हो सकता है। बदलाव होंगे, लेकिन इसमें अभी वक्त है वैसे भाजपा के एक पदाधिकारी ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर एनबीटी ऑनलाइन से कहा है कि परंपरा ये रही है कि पूर्व सीएम या केंद्रीय मंत्री जब संगठन में जाते हैं, तो उन्हें उनकी वरिष्ठता को देखते हुए उपाध्यक्ष या महामंत्री पद का दायित्व दिया जाता है। लेकिन, नितिन नबीन के अध्यक्ष रहते वरिष्ठ नेताओं का उपाध्यक्ष या महासचिव पद पर एडजस्टमेंट इतना आसान नहीं होगा। इसलिए, संगठन और सरकार में बदलाव भले ही तय हों, लेकिन इसमें काफी माथापच्ची है, जिसके चलते समय लगेगा। राज्यसभा की सीटों पर भी एडजस्टमेंट जरूरी भाजपा और सरकार के सामने चुनौती ये है कि एक दर्जन से ज्यादा मंत्रियों के पास दो-दो पोर्टफोलियो है। कई नेताओं का राजनीतिक करियर भी आखिरी दौर में है। इनके अलावा अनेक नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल भी इस साल खत्म हो रहा है। मसलन, इस साल 70 से ज्यादा राज्यसभा सीट खाली होने वाली है, जिनमें से भाजपा के ही 30 के करीब सांसद हैं। मौजूदा विधानसभाओं की शक्ति के हिसाब से पार्टी लगभग 33 सांसदों को उच्च सदन में भेज सकती है। मतलब, यह सारा गुणा-गणित भी नितिन नबीन की जिम्मेदारियों की लिस्ट में आने वाली है। विनोद / 01 फरवरी 26